मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन अचानक निरस्त कर दिया गया। इस फैसले के आते ही सूबे की सियासत का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने मध्य प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास को कलंकित करने का काम किया है। पटवारी ने साफ किया कि यह लड़ाई अब सिर्फ एक राज्यसभा सीट की नहीं रह गई है, बल्कि देश के लोकतंत्र को बचाने की जंग बन चुकी है। उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस तानाशाही के सामने एक कदम भी पीछे नहीं हटेगी और आगामी 10 मार्च को पार्टी के सभी विधायक और कार्यकर्ता चुनाव आयोग के इस फैसले के खिलाफ सामूहिक रूप से भूख हड़ताल पर बैठेंगे।
हैदराबाद कोर्ट का वो नोटिस और कानूनी दांवपेंच, जिसे कांग्रेस ने बताया ‘गुंडागर्दी’
इस पूरे विवाद की जड़ में हैदराबाद की एक अदालत से जारी हुआ एक नोटिस है, जिसे आधार बनाकर मीनाक्षी नटराजन का पर्चा खारिज किया गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कानूनी विशेषज्ञ अजय गुप्ता ने रिटर्निंग ऑफिसर के इस आदेश को पूरी तरह से असंवैधानिक और ‘गुंडागर्दी’ करार दिया है। गुप्ता का दावा है कि कानून की शुरुआती समझ रखने वाला छात्र भी यह बता सकता है कि संबंधित नोटिस किसी भी तरह से आपराधिक श्रेणी में नहीं आता है। कांग्रेस ने अपने लिखित जवाब में इस बात का बकायदा जिक्र भी किया था, लेकिन विधानसभा में बैठे रिटर्निंग ऑफिसर ने उनकी एक नहीं सुनी और मनमाने ढंग से काम किया। पार्टी के लीगल विंग के प्रभारी जेपी धनोपिया ने भी हैरानी जताते हुए कहा कि वे पिछले 25 सालों से चुनावी प्रक्रिया देख रहे हैं, लेकिन ऐसी बेईमानी उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। उनके मुताबिक, शिकायत मुख्य आपत्तिदाता के बजाय बीजेपी से जुड़े नेताओं के इशारे पर की गई थी।
‘वोट चोरी के बाद अब सीट डकैती’ – मीनाक्षी नटराजन ने खोली बीजेपी की रणनीति
नामांकन रद्द होने के बाद खुद मीनाक्षी नटराजन मीडिया के सामने आईं और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की रणनीति पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी के पास पर्याप्त विधायकों की संख्या नहीं थी, उसके बावजूद उन्होंने अपना तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारा था, तभी कांग्रेस को अंदेशा हो गया था कि खेल होने वाला है। मीनाक्षी नटराजन ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी पहले केवल ‘वोट चोरी’ करती थी, लेकिन अब वह सीधे तौर पर ‘सीट डकैती’ करने पर उतारू हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि जब सत्ताधारी दल को यह अहसास हो गया कि कांग्रेस के अंदर पूरी एकता है और विधायकों को तोड़ना नामुमकिन है, तब उन्होंने एक मामूली लीगल नोटिस को ढाल बनाकर शिकायत दर्ज कराई। नटराजन ने साफ किया कि राहुल गांधी देश में जिस लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, मध्य प्रदेश कांग्रेस भी एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ेगी।
विमान रोकने की साजिश और विधायकों की खरीद-फरोख्त की अफवाहों पर बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले में एक और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। सिंघार ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से जानबूझकर ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही थीं कि कांग्रेस के विधायक बिकने वाले हैं और उन्हें करोड़ों रुपये का ऑफर दिया जा रहा है। यही नहीं, उन्होंने एक बड़ी प्रशासनिक साजिश का पर्दाफाश करते हुए दावा किया कि कांग्रेस नेताओं के विमान को करीब 5 घंटे तक उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गई। रनवे पर विमान को सिर्फ दिखाने के लिए खड़ा रखा गया और जैसे ही यहाँ मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने की आधिकारिक घोषणा हुई, वैसे ही तुरंत उड़ान भरने की परमिशन दे दी गई। इस बीच, कांग्रेस प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने भी बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसी निष्पक्ष संस्थाओं का अस्तित्व अब खतरे में है और आज का दिन देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ‘काले दिन’ के रूप में दर्ज किया जाएगा।
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