शिक्षा मंत्री का इस्तीफा तो महज शुरुआत! जंतर-मंतर पर बैठे अभिजीत दीपके का बड़ा ऐलान, अभी पूरी होनी बाकी हैं ये 3 बड़ी मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के अचानक इस्तीफे के बाद भले ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई हो, लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कमान संभाले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने साफ कर दिया है कि उनका संघर्ष अभी थमा नहीं है। शनिवार दोपहर को प्रधान के त्यागपत्र की खबर सामने आने के बाद जश्न का माहौल जरूर बना, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी बची हुई सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक यह धरना-प्रदर्शन और अनशन यूं ही जारी रहेगा। सीजेपी प्रमुख का यह बयान साफ संकेत देता है कि छात्र अब किसी भी आधे-अधुरे समझौते के मूड में नहीं हैं।

सरकार की जिद टूटने पर बोले अभिजीत दीपके

मीडिया और राजनीतिक विश्लेषकों के उस दावे पर कटाक्ष करते हुए जिसमें कहा जा रहा था कि यह सरकार बेहद जिद्दी है और किसी का इस्तीफा नहीं ले सकती, अभिजीत दीपके ने अपनी जीत का डंका बजाया। उन्होंने कहा कि पिछले 36 दिनों से लगातार उनसे यह सवाल पूछा जाता था कि क्या भारत में कभी ऐसी कोई क्रांति आ सकती है? दीपके ने गर्व से कहा कि आज का यह इस्तीफा इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि यदि देश का युवा डरना छोड़ दे और तानाशाही के आगे न झुके, तो वह बड़े से बड़े सूरमाओं को भी झुकने पर मजबूर कर सकता है। उन्होंने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि लोकतंत्र में डर की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

CJP प्रमुख ने रखी तीन नई और अहम शर्तें

धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के बाद अभिजीत दीपके ने अपनी अपडेटेड डिमांड लिस्ट मीडिया के सामने रखी। उन्होंने साफ कहा कि शिक्षा मंत्री का जाना उनकी पहली सफलता है, लेकिन न्याय अभी पूरा नहीं हुआ है। उनकी मुख्य तीन बची हुई मांगें यह हैं कि पेपर लीक के सदमे या आत्महत्या के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा, 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी। साथ ही, इस पूरे आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज किए गए सभी फर्जी मुकदमे तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाने चाहिए।

‘कॉकरोच’ शैली का संघर्ष और आगे की हुंकार

अपने तीखे अंदाज के लिए जाने जाने वाले अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि ‘कॉकरोच’ जिस सिस्टम में घुस जाता है, उसे अंदर से हिलाकर रख देता है। उन्होंने पुलिस प्रशासन और सुरक्षाकर्मियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि छात्र मिलकर देश के एक कद्दावर मंत्री का इस्तीफा ले सकते हैं, तो वे बाकी प्रशासनिक ज्यादतियों का हिसाब भी लेना जानते हैं। जंतर-मंतर पर बैठे इन युवाओं का हौसला अब सातवें आसमान पर है और उनका यह आंदोलन देश भर के छात्रों के लिए एक नया उदाहरण बन चुका है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार सीजेपी की इन शेष तीन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।

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