हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। सोमवार को कारोबार शुरू होते ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बड़े दबाव में आ गए। शुरुआती घंटों में ही बीएसई सेंसेक्स 1100 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा फिसल गया। बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में आई इस अचानक गिरावट से छोटे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया।
सोमवार को सेंसेक्स करीब 76280 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 23850 के आसपास बना रहा। बाजार खुलते ही कई दिग्गज कंपनियों के शेयर लाल निशान में चले गए। खासतौर पर बैंकिंग, मेटल, ऑटो और एविएशन सेक्टर के शेयरों पर ज्यादा दबाव दिखाई दिया। निवेशकों को सबसे ज्यादा झटका उन कंपनियों में लगा जिनका कारोबार सीधे तौर पर तेल कीमतों और आयात लागत से जुड़ा हुआ है।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिसने भारतीय बाजार की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर कंपनियों की लागत और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, एविएशन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की लागत बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा दुनिया भर के तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है। इसी डर से वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तरफ बढ़ रहे हैं। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। विदेशी निवेशक लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बिकवाली और तेज हो गई है।
कमजोर रुपये ने बढ़ाई बाजार की परेशानी
भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। सोमवार को रुपया 95.62 प्रति डॉलर के स्तर तक फिसल गया। रुपये की कमजोरी का असर सीधे तौर पर आयात करने वाली कंपनियों पर पड़ता है। इससे कच्चा माल महंगा हो जाता है और कंपनियों का खर्च बढ़ जाता है। यही कारण है कि बाजार में निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।
आज के कारोबार में टाइटन, एसबीआई और इंडिगो जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। टाइटन के शेयर में 6 प्रतिशत से ज्यादा की कमजोरी देखने को मिली, जबकि एसबीआई और इंडिगो के शेयर भी करीब 3 प्रतिशत तक टूट गए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि वैश्विक संकेत अभी भी कमजोर बने हुए हैं।
एशियाई और अमेरिकी बाजारों का भी मिला-जुला असर
भारतीय बाजार पर वैश्विक संकेतों का असर भी साफ दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोप्सी बढ़त में रहे, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बाजार दबाव में दिखाई दिया। दूसरी ओर अमेरिकी बाजारों में भी अस्थिरता बनी हुई है। अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में गिरावट ने एशियाई निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
हालांकि पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार मजबूती के साथ बंद हुए थे, लेकिन बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों का मूड खराब कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल और मध्य पूर्व की स्थिति पर निर्भर करेगी। अगर हालात नहीं सुधरे तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।
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