पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील का असर अब सर्राफा बाजार में दिखाई देने लगा है। सोमवार को नए कारोबारी हफ्ते की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में सोने की कीमतों में मामूली कमी दर्ज की गई। पिछले कुछ हफ्तों से सोना लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच रहा था, लेकिन अब बाजार में खरीदारी की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की अपील के बाद आम लोगों के बीच निवेश को लेकर सावधानी बढ़ी है, जिसका सीधा असर मांग पर पड़ रहा है। यही वजह है कि कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है।
चांदी भी हुई सस्ती, बड़े शहरों में बदले रेट
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी हल्की गिरावट दर्ज की गई है। देश में आज चांदी का औसत भाव करीब 2,74,900 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है, जो पिछले दिन के मुकाबले लगभग 100 रुपये कम है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में चांदी की कीमत 2,74,900 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जबकि चेन्नई और हैदराबाद में भाव अभी भी 2,80,000 रुपये प्रति किलो पर स्थिर बने हुए हैं। कारोबारियों का कहना है कि पिछले सप्ताह बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। एक समय सोना अपने एक महीने के निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन सप्ताह खत्म होते-होते फिर तेजी लौट आई। अब निवेशक अंतरराष्ट्रीय हालात और घरेलू मांग दोनों पर नजर बनाए हुए हैं।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे बड़ा कारण प्रधानमंत्री की अपील को माना जा रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। ऐसे में जब सरकार की ओर से लोगों को खरीदारी टालने की सलाह दी जाती है, तो बाजार की धारणा तुरंत बदल जाती है। इसके अलावा, ईरान-अमेरिका तनाव और मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। सरकार विदेशी मुद्रा बचाने की कोशिश में है, इसलिए लोगों से गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील की गई है। बाजार में यह चर्चा भी तेज है कि अगर सोने की मांग कम नहीं हुई तो सरकार आयात शुल्क बढ़ा सकती है। इसी आशंका के चलते कई निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं और अपने पुराने स्टॉक बेच रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि फिलहाल बाजार बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। हाल ही में सोना 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। ऐसे में निवेशकों को अब डर है कि ऊंचे स्तर से कीमतों में बड़ी गिरावट भी आ सकती है। यही वजह है कि कई लोग अभी नई खरीदारी करने से बच रहे हैं। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर भी मान रहे हैं। उनका कहना है कि अगर कीमतों में और गिरावट आती है तो भविष्य में खरीदारी के बेहतर मौके बन सकते हैं। फिलहाल बाजार की नजर सरकार की अगली आर्थिक रणनीति और अंतरराष्ट्रीय हालात पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
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