उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले विपक्षी राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस फिलहाल INDIA गठबंधन के तहत साथ हैं, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही कांग्रेस के भीतर गठबंधन को लेकर अलग-अलग राय सामने आने लगी है। पार्टी का एक वर्ग मानता है कि समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए फायदेमंद रहेगा, जबकि दूसरा वर्ग चाहता है कि पार्टी अपने दम पर मैदान में उतरे। यही वजह है कि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह बहस और तेज हो सकती है, क्योंकि सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर अंतिम फैसला होना बाकी है।
गठबंधन के समर्थक क्या कह रहे हैं?
कांग्रेस के एक बड़े वर्ग का मानना है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी अभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं है कि वह अकेले दम पर बड़ा चुनावी मुकाबला कर सके। इस गुट का तर्क है कि समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन जारी रहने से कांग्रेस को अधिक सीटें जीतने का मौका मिल सकता है। उनका कहना है कि विधानसभा में पार्टी के विधायकों की संख्या बढ़ेगी तो संगठन को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही यदि विपक्षी गठबंधन सत्ता तक पहुंचता है तो सरकार में भागीदारी के जरिए कांग्रेस को प्रदेश में फिर से मजबूत आधार बनाने का अवसर मिल सकता है। इस गुट का मानना है कि भाजपा जैसी मजबूत पार्टी का मुकाबला करने के लिए विपक्षी एकता जरूरी है और गठबंधन टूटने का फायदा सीधे सत्तारूढ़ दल को मिल सकता है।
अकेले चुनाव लड़ने की मांग क्यों उठ रही है?
दूसरी तरफ कांग्रेस का एक वर्ग गठबंधन के खिलाफ नजर आ रहा है। इस गुट का कहना है कि गठबंधन से कुछ सीटें भले मिल जाएं, लेकिन पार्टी का अपना जनाधार मजबूत नहीं होगा। उनका तर्क है कि जब तक कांग्रेस अधिक से अधिक सीटों पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारेगी, तब तक संगठन को मजबूत करना मुश्किल होगा। इस वर्ग का मानना है कि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से बड़ी ताकत है, इसलिए गठबंधन में जीत का श्रेय भी अधिकतर सपा को ही मिलेगा। ऐसे में कांग्रेस को राजनीतिक लाभ कम मिलेगा। इस गुट का यह भी मानना है कि यदि पार्टी अकेले चुनाव लड़ती है तो वह नए वोटरों को जोड़ सकती है और अपने लिए एक स्थायी वोट बैंक तैयार कर सकती है। महिलाओं, ब्राह्मणों, मुस्लिम और पिछड़े वर्गों के बीच संगठन को मजबूत करने की रणनीति भी इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है।
पिछले चुनावों का अनुभव क्या कहता है?
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन पहले भी चुनावी मैदान में उतर चुका है। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। इसके बाद दोनों दल अलग हो गए थे। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां फिर एक साथ आईं और गठबंधन को अच्छा फायदा मिला। इस चुनाव में विपक्षी दलों के प्रदर्शन ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। यही वजह है कि अब फिर से यह सवाल उठ रहा है कि विधानसभा चुनाव में दोनों दल साथ रहेंगे या अलग-अलग रास्ता चुनेंगे। फिलहाल समाजवादी पार्टी गठबंधन जारी रखने के पक्ष में दिखाई देती है, जबकि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एकमत नहीं बन पाया है। ऐसे में आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि उत्तर प्रदेश में NDA का मुकाबला INDIA गठबंधन करेगा या फिर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस अलग-अलग चुनावी मैदान में उतरेंगी।








