यूपी में घर बनाना हुआ और महंगा! सरकार ने बढ़ाए जमीन के रेट, लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

UP Housing Rates Hike: उत्तर प्रदेश में अपना घर बनाने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। यूपी आवास एवं विकास परिषद ने प्रदेश के कई प्रमुख शहरों में आवासीय योजनाओं के तहत जमीन की नई दरें लागू कर दी हैं। इस फैसले के बाद लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर, बस्ती, सहारनपुर, कानपुर, मेरठ और बरेली समेत कई शहरों में प्लॉट खरीदना पहले से अधिक महंगा हो गया है। परिषद की ओर से जारी नई दरों के अनुसार कुछ क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में प्रति वर्ग मीटर हजारों रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो आने वाले समय में प्लॉट खरीदकर घर बनाने की योजना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ी हुई दरों के कारण बड़े आकार के प्लॉट खरीदने वालों को लाखों रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ सकते हैं।

लखनऊ में सबसे ज्यादा असर, कई योजनाओं की कीमतें बढ़ीं

राजधानी लखनऊ में आवास विकास परिषद की कई लोकप्रिय योजनाओं में जमीन के रेट बढ़ाए गए हैं। खासतौर पर वृंदावन योजना और अवध विहार योजना में कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। कुछ योजनाओं में प्रति वर्ग मीटर 6,500 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है, जो हाल के वर्षों में सबसे बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। उदाहरण के तौर पर, वृंदावन योजना के कुछ सेक्टरों में जमीन की कीमतें पहले की तुलना में काफी ऊपर पहुंच गई हैं। इसी तरह आम्रपाली योजना, गोकुल ग्राम और अन्य आवासीय क्षेत्रों में भी नई दरें लागू कर दी गई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल फ्लैट्स की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। परिषद का मानना है कि फ्लैट्स की मांग अभी अपेक्षाकृत कम है, इसलिए उनमें शामिल जमीन की लागत पुरानी दरों पर ही रखी गई है। इससे फ्लैट खरीदने वालों को तत्काल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

 वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में भी बढ़ीं कीमतें

नई दरों का असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, गोरखपुर और अन्य शहरों में भी आवासीय योजनाओं की कीमतों में बदलाव किया गया है। वाराणसी में कई योजनाओं में जमीन की दरें अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार तय की गई हैं और कुछ क्षेत्रों में कीमतें काफी ऊंचे स्तर तक पहुंच चुकी हैं। प्रयागराज में भी प्रमुख आवासीय योजनाओं में नई दरें लागू कर दी गई हैं। वहीं धार्मिक और पर्यटन महत्व के कारण तेजी से विकसित हो रहे अयोध्या में भी जमीन की कीमतों पर इसका असर देखने को मिलेगा। गोरखपुर, बस्ती और सहारनपुर जैसे शहरों में भी योजनाओं के आधार पर नई कीमतें तय की गई हैं। परिषद का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों की विकास स्थिति, बाजार मूल्य और अन्य आर्थिक कारकों को ध्यान में रखकर यह संशोधन किया गया है। ऐसे में अलग-अलग शहरों में बढ़ोतरी की दर भी अलग-अलग रखी गई है।

आगे भी बढ़ सकते हैं रेट, क्या है परिषद की योजना?

आवास विकास परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह वृद्धि नियमित समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार, कई वर्षों से जमीन की कीमतों में कोई बड़ा संशोधन नहीं किया गया था। अब जिन क्षेत्रों में विकास कार्य जारी हैं और जहां परिषद की जमीन उपलब्ध है, वहां भविष्य में भी चरणबद्ध तरीके से दरों में बढ़ोतरी की जा सकती है। परिषद ने संकेत दिए हैं कि कुछ योजनाओं में हर वर्ष निर्धारित वित्तीय मानकों के अनुसार कीमतों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही जहां जमीन की मौजूदा दरें जिला प्रशासन द्वारा तय सर्किल रेट से कम हैं, वहां उन्हें सर्किल रेट के बराबर लाने पर भी विचार किया जा सकता है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से राज्य में आवासीय परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है, लेकिन दूसरी ओर यह विकास परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने में भी मदद करेगा। ऐसे में घर खरीदने या प्लॉट लेने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले समय में बाजार की स्थिति पर नजर रखना और भी जरूरी हो जाएगा।

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