नोएडा हिंसा और कंपनियों में तोड़फोड़ के बाद सैलरी बढ़ोतरी को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, जाने कितना बढ़ाया वेतन?

Noida Violence: नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी में करीब 21 फीसदी की अंतरिम बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। यह फैसला सोमवार देर रात लिया गया और इसके लिए आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन और बढ़ते तनाव के बाद पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर दिया गया था। सरकार का कहना है कि यह कदम श्रमिकों की मांगों, औद्योगिक माहौल और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने के लिए जरूरी था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक हाईपावर कमेटी गठित की गई थी, जिसकी सिफारिशों के आधार पर यह अंतरिम वेतन वृद्धि लागू की गई है। इस फैसले के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह निर्णय अचानक लिया गया या पहले से इसकी तैयारी चल रही थी, खासकर जब आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था।

तीन श्रेणियों में बंटा नया वेतन ढांचा – किसे कितना मिलेगा फायदा?

सरकार द्वारा घोषित नई अंतरिम मजदूरी व्यवस्था को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। नोएडा-गाजियाबाद जैसे औद्योगिक क्षेत्रों, नगर निगम वाले शहरों और अन्य जिलों के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं। सबसे ज्यादा बदलाव गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में देखने को मिला है, जहां अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है। अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़ाकर 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों का वेतन 13,940 रुपये से बढ़ाकर 16,868 रुपये कर दिया गया है। अन्य नगर निगम क्षेत्रों और जिलों में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने इसे अंतरिम राहत बताया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। अधिकारियों का कहना है कि आगे चलकर वेज बोर्ड के माध्यम से इसका विस्तृत पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा।

 कंपनियों में तोड़फोड़ से मचा हड़कंप

नोएडा में श्रमिक आंदोलन ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया और कई जगहों पर हिंसा की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर करीब 400 कंपनियों में तोड़फोड़ की और कई जगह कामकाज को जबरन बंद करा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1000 वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और कई गाड़ियों में आग भी लगा दी गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस दौरान 60 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया और 250 से ज्यादा श्रमिकों को हिरासत में लिया गया है। झड़प में एक सब-इंस्पेक्टर सहित पांच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हिंसा का असर केवल नोएडा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फरीदाबाद, पलवल और लखनऊ तक इसका असर देखने को मिला, जहां श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।

सरकार की सख्ती और अफवाहों पर रोक

सरकार ने इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर भी सख्त रुख अपनाया है। कुछ प्लेटफॉर्म पर यह दावा किया जा रहा था कि न्यूनतम मजदूरी सीधे 20,000 रुपये कर दी गई है, जिसे सरकार ने पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और अफवाहें न फैलाएं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए हैं और नियोक्ता संगठनों से भी श्रमिकों के अधिकारों का पालन करने को कहा है। सरकार का कहना है कि श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और उचित वेतन सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है, लेकिन कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में हाईपावर कमेटी की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीतियों पर निर्णय लिया जाएगा, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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