2 किलो के आम को देखकर क्यों रुक गए CM योगी? लखनऊ के मैंगो फेस्टिवल में 800 किस्मों ने सबको किया हैरान

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुरू हुआ तीन दिवसीय आम महोत्सव इस बार कई खास वजहों से चर्चा में है। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस आयोजन में 800 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें दशहरी, चौसा, लंगड़ा, आम्रपाली, रटौल, गौरजीत और हुस्न-ए-आरा जैसी दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं। महोत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। प्रदर्शनी में कुछ ऐसे विशाल आम भी रखे गए जिनका वजन करीब दो से ढाई किलो तक बताया गया। इन बड़े आकार के आमों ने आगंतुकों के साथ-साथ मुख्यमंत्री का भी ध्यान अपनी ओर खींचा। आयोजन में किसानों, बागवानों, कृषि वैज्ञानिकों और खरीदारों की बड़ी संख्या मौजूद है, जिससे यह केवल प्रदर्शनी नहीं बल्कि खेती और व्यापार का महत्वपूर्ण मंच भी बन गया है।

किसानों को मिलेंगे नई तकनीक और निर्यात से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव

आम महोत्सव का उद्देश्य केवल अलग-अलग किस्मों का प्रदर्शन करना नहीं है, बल्कि किसानों को आधुनिक बागवानी और बेहतर बाजार उपलब्ध कराना भी है। कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से आए कृषि विशेषज्ञ किसानों को उन्नत खेती, रोग नियंत्रण, पैकेजिंग, गुणवत्ता सुधार और निर्यात की नई तकनीकों की जानकारी दे रहे हैं। इसके अलावा आम के पौधों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जहां किसान नई किस्मों के पौधे खरीद सकते हैं। बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का भी आयोजन किया गया है। महोत्सव में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात और छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

आम उत्पादन और निर्यात में लगातार मजबूत हो रहा उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा आम उत्पादक राज्य माना जाता है। प्रदेश में लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है और हर साल बड़ी मात्रा में उत्पादन होता है। यहां का दशहरी, लंगड़ा, चौसा, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी पसंद किए जाते हैं। प्रदेश से आम और आम के गूदे का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। लंदन, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, सिंगापुर, जापान, कतर, रूस, बेल्जियम और न्यूजीलैंड जैसे देशों तक उत्तर प्रदेश के आम पहुंच रहे हैं। निर्यात को आसान बनाने के लिए आधुनिक पैक हाउस, गुणवत्ता जांच और फलों के उपचार की सुविधाओं को भी लगातार विकसित किया जा रहा है। सरकार किसानों को पुराने बागों के सुधार और उत्पादन बढ़ाने के लिए सब्सिडी सहित कई योजनाओं का लाभ भी दे रही है।

दशहरी से मियाजाकी तक, हर स्वाद के लिए मौजूद खास किस्में

महोत्सव में पारंपरिक किस्मों के साथ कई दुर्लभ और महंगे आम भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास और बिना रेशे वाले गूदे के लिए प्रसिद्ध है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा अपने अलग स्वाद और खुशबू के कारण पहचान रखता है। सहारनपुर और हरदोई का चौसा, बागपत का रटौल तथा पूर्वांचल का गौरजीत भी खास मांग वाले आमों में शामिल हैं। वहीं जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है, अब उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों द्वारा भी उगाई जा रही है। इसका लाल रंग, अत्यधिक मिठास और आकर्षक रूप इसे बेहद खास बनाता है। आम महोत्सव के जरिए प्रदेश अपनी पारंपरिक पहचान को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी अपनी मौजूदगी और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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