उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानों के तीर अक्सर चलते रहते हैं, लेकिन इस बार योगी सरकार के एक राज्यमंत्री ने सीधे समाजवादी पार्टी के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव को लेकर एक ऐसी टिप्पणी कर दी है, जिसने पूरे सूबे के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। बाराबंकी के दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच से बोलते हुए राज्यमंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने बिना किसी झिझक के ऑन-रिकॉर्ड कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान अपराधियों और माफियाओं को खुला संरक्षण दिया जाता था। मंत्री यहीं नहीं रुके, उन्होंने एक बेहद तल्ख और चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि एक समय ऐसा था जब खुद मुलायम सिंह यादव माफिया अतीक अहमद के कुत्ते को सहलाने का काम करते थे। उन्होंने कहा कि सपा ने उस खूंखार अपराधी को सजा दिलाने के बजाय उसे बढ़ावा दिया, जिससे पूरे प्रदेश में कानून का इकबाल खत्म हो गया था। इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है और हर तरफ इसी की चर्चा हो रही है।
योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति बनाम पुराना दौर: मंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां
अपने इस तीखे और सस्पेंस से भरे संबोधन में मंत्री सतीश चंद्र शर्मा ने अतीत की कानून-व्यवस्था की तुलना मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल से की। उन्होंने जनता के सामने दावा किया कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में जिस माफिया राज का बोलबाला था, उसे योगी सरकार ने पूरी तरह से उखाड़ फेंका है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और अपराधियों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के चलते ही अतीक अहमद जैसे बड़े-बड़े माफियाओं के साम्राज्य को नेस्तनाबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि आज अपराधियों को उनके सही मुकाम यानी जेल की सलाखों के पीछे या फिर कानून के दायरे में कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा रही है। मंत्री के मुताबिक, अब यूपी की माताएं-बहनें सुरक्षित हैं और व्यापारी बिना किसी डर के अपना कारोबार कर रहे हैं। इस बयान के जरिए उन्होंने आगामी चुनावों से ठीक पहले यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा सरकार ही प्रदेश में सुरक्षित और भयमुक्त माहौल दे सकती है।
समाजवादी पार्टी का तीखा पलटवार: सार्वजनिक माफी और कड़ी कार्रवाई की उठी मांग
मंत्री सतीश चंद्र शर्मा के इस बेहद आक्रामक और निजी हमले वाले बयान के सामने आते ही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी भड़क उठी है। सपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस टिप्पणी पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे अत्यंत अमर्यादित और ओछी राजनीति का प्रतीक बताया है। सपा प्रवक्ताओं का कहना है कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) देश के रक्षा मंत्री रहे हैं और उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहकर उन्होंने प्रदेश के विकास में ऐतिहासिक योगदान दिया है। उनके निधन के बाद इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना भाजपा की हताशा को दर्शाता है। समाजवादी पार्टी ने इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मंत्री के खिलाफ तुरंत सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही सपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक मंत्री सतीश चंद्र शर्मा अपने इस बयान के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक वे इस मुद्दे को शांत नहीं होने देंगे और इसे जनता के बीच लेकर जाएंगे।
विधानसभा चुनाव से पहले गर्माई सूबे की जमीन: क्या है इसके पीछे के सियासी मायने?
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस विवाद को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राजनेताओं के बीच जुबानी जंग और तीखी होती जाएगी। मंत्री सतीश चंद्र शर्मा, जो बाराबंकी की दरियाबाद सीट से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं और वर्तमान में खाद्य एवं रसद राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उनके इस बयान ने भाजपा और सपा के बीच की खाई को और चौड़ा कर दिया है। जहां भाजपा इस बयान के सहारे सपा को ‘माफिया समर्थक’ साबित करने की अपनी पुरानी रणनीति को और धार दे रही है, वहीं सपा इसे नेताजी के अपमान से जोड़कर अपने पारंपरिक वोट बैंक और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के मौके के रूप में देख रही है। फिलहाल भाजपा के केंद्रीय या राज्य संगठन की तरफ से इस बयान पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन इस एक बयान ने यूपी की चुनावी बिसात पर शह और मात के खेल को और ज्यादा दिलचस्प और आक्रामक बना दिया है।
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