Ayodhya Ram Mandir में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि मंदिर ट्रस्ट को काफी पहले से वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत के बारे में जानकारी दी गई थी। बताया जा रहा है कि दान राशि के रिकॉर्ड, रसीद जारी करने की प्रक्रिया और चढ़ावे के रूप में मिलने वाले कीमती सामान के हिसाब-किताब को लेकर समय-समय पर सुझाव भी दिए गए थे। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
बिना रसीद दान और आभूषणों के रिकॉर्ड पर लगे आरोप
रिपोर्ट्स के अनुसार, मंदिर निर्माण के शुरुआती चरण में लेखा-जोखा देखने वाले कुछ विशेषज्ञों ने दान संग्रह की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने की सलाह दी थी। आरोप हैं कि कुछ मामलों में दान लेने के बाद नियमित रसीद जारी नहीं की जा रही थी और अस्थायी रिकॉर्ड के जरिए लेन-देन दर्ज किया जा रहा था। इसके अलावा, श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं के रखरखाव और दस्तावेजीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। सूत्रों का दावा है कि इन मुद्दों को संबंधित लोगों के सामने रखा गया, लेकिन सुधार के लिए कोई बड़ा प्रशासनिक बदलाव नहीं किया गया।
निर्माण से चढ़ावे तक बढ़ा दायरा
मंदिर निर्माण के दौरान मुख्य रूप से चंदा जुटाने पर ध्यान था, लेकिन प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में तेजी से बढ़ोतरी हुई। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत महसूस की गई। आरोप यह भी हैं कि दान की बढ़ती मात्रा के बावजूद पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पेशेवर बनाने की दिशा में अपेक्षित कदम समय पर नहीं उठाए गए। कुछ लोगों का मानना था कि आंतरिक मामलों को सार्वजनिक करने से मंदिर की छवि प्रभावित हो सकती है, इसलिए शिकायतों को गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पारदर्शिता की मांग तेज, ट्रस्ट के जवाब का इंतजार
दान और चढ़ावे से जुड़े इन आरोपों के बाद अब पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में वित्तीय प्रबंधन के लिए मजबूत ऑडिट सिस्टम, डिजिटल रिकॉर्ड और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। इससे न केवल श्रद्धालुओं का भरोसा मजबूत होता है, बल्कि किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका भी कम हो जाती है। फिलहाल, पूरा मामला आरोपों और दावों के स्तर पर है। ट्रस्ट की ओर से विस्तृत स्पष्टीकरण और किसी संभावित जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और जानकारी सामने आने की संभावना है।








