CJP नेताओं से मुलाकात के बाद आखिर क्या बोले जेपी नड्डा? कहा- ‘बातचीत हमेशा ही…’

पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों की मुलाकात अब चर्चा का विषय बन गई है। बैठक के एक दिन बाद जब जेपी नड्डा एनडीए संसदीय दल की बैठक में पहुंचे, तो मीडिया ने उनसे इस मुलाकात के बारे में सवाल किया। इस पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “बातचीत ठीक रही, बातचीत हमेशा ही ठीक रहती है।” उनके इस छोटे से बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि क्या सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आगे भी बातचीत का रास्ता खुला रहेगा। हालांकि, नड्डा ने इस दौरान बैठक में हुई चर्चा या मांगों पर कोई विस्तार से जानकारी नहीं दी।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को सौंपा लिखित ज्ञापन

जानकारी के अनुसार, सोमवार को CJP प्रतिनिधियों ने पहली बार सरकार से औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद सुबह करीब 11:50 बजे जेपी नड्डा और प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक हुई। यह बातचीत करीब दस मिनट तक चली। बैठक के दौरान नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वे अपनी सभी मांगें लिखित रूप में दें, ताकि उन पर विस्तार से विचार किया जा सके। इसके बाद प्रतिनिधियों ने अलग कमरे में जाकर अपनी मांगों का ज्ञापन तैयार किया और शाम को दोबारा मुलाकात कर उसे केंद्रीय मंत्री को सौंप दिया। बताया जा रहा है कि ज्ञापन में पेपर लीक मामले से जुड़े कई मुद्दों और मांगों का उल्लेख किया गया है।

किन नेताओं ने की मुलाकात और क्या मिला जवाब?

CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से उनके आवास पर मुलाकात की। यह बैठक ऐसे समय हुई, जब दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस रोक रही थी। मुलाकात के बाद CJP प्रतिनिधियों ने दावा किया कि उन्होंने अपनी सभी मांगें सरकार के सामने रख दी हैं। उनका कहना है कि जेपी नड्डा ने आश्वासन दिया कि इन मांगों पर सरकार के भीतर चर्चा की जाएगी। साथ ही उन्होंने इस प्रक्रिया के लिए कुछ समय देने की भी बात कही। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इन मांगों को स्वीकार करने या किसी निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

बातचीत से निकलेगा समाधान या आंदोलन होगा तेज?

फिलहाल CJP का आंदोलन जारी है और प्रदर्शनकारी अपनी प्रमुख मांगों पर अड़े हुए हैं। दूसरी ओर, सरकार की ओर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद शुरू होना सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार की अगली रणनीति पर निर्भर करेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और क्या आगे और दौर की बातचीत होती है। यदि किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बनती है, तो आंदोलन आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रह सकती है।

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