Deer Killing Case: छत्तीसगढ़ के Raigarh जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। देलारी गांव में 16 अप्रैल को पानी की तलाश में जंगल से भटककर आए एक चीतल (चित्तीदार हिरण) पर कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। आसपास मौजूद ग्रामीणों ने पहले तो उसे कुत्तों से बचा लिया, जिससे लगा कि इंसानियत अभी जिंदा है। लेकिन कुछ ही देर बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसने सबको हैरान कर दिया।
मददगार बने शिकारी
हिरण को बचाने वाले वही लोग कुछ समय बाद खुद शिकारी बन गए। आरोप है कि उन्होंने घायल चीतल को वन विभाग को सौंपने के बजाय उसका शिकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने हिरण का मांस आपस में बांट लिया और अपने घर ले गए। बताया जा रहा है कि कुछ आरोपियों ने मांस पकाकर खा भी लिया। यह घटना न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण के प्रति गंभीर लापरवाही भी दिखाती है।
वन विभाग की कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम ने तुरंत कार्रवाई की। अधिकारियों ने संदिग्ध लोगों के घरों पर छापेमारी की, जहां से सबूत मिले और पूछताछ में आरोपियों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। इसके बाद पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इन सभी के खिलाफ Wildlife Protection Act 1972 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
वन्यजीव संरक्षण पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोग अब भी वन्यजीवों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेते। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के आसपास बसे इलाकों में जागरूकता की कमी के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में लेने की हिम्मत न करे। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि अगर कोई वन्यजीव घायल अवस्था में मिले, तो तुरंत वन विभाग को सूचना दें, न कि खुद कोई कदम उठाएं।
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