मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में फैले साल के घने जंगल इन दिनों एक गंभीर चुनौती का सामना कर रहे हैं। वर्षों से प्रकृति की धरोहर माने जाने वाले ये पेड़ एक खास प्रकार के कीट के हमले से प्रभावित हो रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, जिले के कई वन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में साल के पेड़ों पर इस कीट का असर देखा गया है। यह कीड़ा पेड़ की बाहरी सतह पर नहीं, बल्कि उसके तने के अंदर जाकर नुकसान पहुंचाता है। धीरे-धीरे यह पेड़ को अंदर से कमजोर कर देता है, जिससे उसकी वृद्धि रुक जाती है और समय के साथ पेड़ सूखने लगता है. वन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो जंगलों की जैव विविधता और पर्यावरण पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
लंबे मूंछों वाला कीड़ा बना जंगलों का दुश्मन
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह एक विशेष प्रकार का बोरर कीट है, जिसकी पहचान इसकी लंबी मूंछों और भूरे रंग से की जाती है। यह कीट बरसात के मौसम में पेड़ों की छाल के भीतर अंडे देता है। अंडों से निकलने वाले लारवा पेड़ के तने के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और लकड़ी को अंदर से खाना शुरू कर देते हैं। शुरुआत में इसका असर दिखाई नहीं देता, लेकिन कुछ समय बाद पेड़ के नीचे लकड़ी के चूरे जैसा पदार्थ जमा होने लगता है, जो संक्रमण का संकेत माना जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि एक बार जब यह कीट पेड़ के अंदर सक्रिय हो जाता है, तो पेड़ की प्राकृतिक विकास प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है। यही वजह है कि वन विभाग लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है।
कीट पकड़ने के लिए ग्रामीणों को बनाया गया भागीदार
समस्या की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने एक विशेष अभियान शुरू किया है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों को भी शामिल किया गया है। इस अभियान के तहत कीट पकड़ने वाले लोगों को प्रति कीट प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इससे एक तरफ जंगलों को बचाने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिला है। अभियान के दौरान हजारों ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में पहुंचकर कीटों को पकड़ने का काम कर रहे हैं। विभाग की ओर से उन्हें कीटों की पहचान और सुरक्षित तरीके से पकड़ने की जानकारी भी दी गई है। इस पहल को स्थानीय स्तर पर अच्छा सहयोग मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग ले रहे हैं।
अनोखे तरीके से पकड़े जा रहे कीड़े, पर्यावरण बचाने की कोशिश जारी
वन विभाग ने कीट नियंत्रण के लिए कई वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों का उपयोग किया है। पेड़ों से निकलने वाले रेजिन की गंध का इस्तेमाल कर कीटों को आकर्षित किया जा रहा है, जिससे उन्हें आसानी से पकड़ा जा सके। सुबह के समय, जब कीट कम सक्रिय रहते हैं, तब उन्हें एकत्र किया जाता है। ग्रामीण इन्हें पकड़कर वन विभाग को सौंपते हैं, जहां उनका रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि जुलाई के अंत में एकत्र किए गए कीटों का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा। वन विभाग को उम्मीद है कि इस सामूहिक प्रयास से साल के जंगलों को बड़े नुकसान से बचाया जा सकेगा। यह अभियान इस बात का भी उदाहरण बन रहा है कि जब स्थानीय समुदाय और प्रशासन मिलकर काम करते हैं, तो पर्यावरण संरक्षण के बेहतर परिणाम सामने आते हैं।
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