मराठी जरूरी या नौकरी खतरे में? नए नियम पर बवाल, CM फडणवीस बोले- ‘अगर हिंसा हुई तो…’

Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने फैसला लिया है कि अब ऑटो और टैक्सी चलाने वालों को मराठी भाषा आनी चाहिए। इसके लिए 1 मई से नियम लागू करने की तैयारी है। सरकार का कहना है कि इससे यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बात करना आसान होगा और मराठी भाषा को बढ़ावा मिलेगा। अगर कोई चालक नियम नहीं मानता, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है, यहां तक कि लाइसेंस रद्द होने का खतरा भी बताया जा रहा है।

CM का बयान: सख्ती भी, नरमी भी

इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने साफ कहा कि मराठी को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन किसी पर जबरदस्ती नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो ड्राइवर मराठी नहीं जानते, उन्हें सरकार सिखाएगी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि भाषा के नाम पर कोई भी हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी। यानी सरकार एक तरफ नियम लागू करना चाहती है, लेकिन दूसरी तरफ माहौल खराब नहीं होने देना चाहती।

सरकार देगी मराठी सीखने की सुविधा

सरकार ने यह भी कहा है कि गैर-मराठी ड्राइवरों के लिए फ्री में मराठी सिखाने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए क्लासेस चलाई जाएंगी, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों होंगी। मकसद यह है कि ड्राइवर रोजमर्रा की बातचीत के लिए जरूरी मराठी सीख सकें। हालांकि इतने कम समय में सभी को सिखाना आसान नहीं होगा, इसलिए इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

ड्राइवर यूनियन नाराज, आंदोलन की चेतावनी

इस फैसले का सबसे ज्यादा विरोध ऑटो और टैक्सी यूनियन कर रही हैं। उनका कहना है कि अचानक नियम लागू करने से उनकी नौकरी पर असर पड़ेगा। कई ड्राइवरों का कहना है कि उन्हें भाषा सीखने के लिए समय और सुविधा चाहिए। यूनियनों ने 4 मई से आंदोलन करने की चेतावनी दी है। वहीं कुछ लोग इस फैसले का समर्थन भी कर रहे हैं और इसे स्थानीय पहचान से जोड़ रहे हैं। अब देखना होगा कि यह नियम लागू होने के बाद हालात कैसे रहते हैं।

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