पूर्व जज की जमानत पर कोर्ट ने लगाया ब्रेक, ट्विशा शर्मा केस में बड़ा अपडेट, जानें क्या हुआ?

Twisha Sharma Death Case: भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में आरोपी पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए फिलहाल जेल से रिहाई देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जिस घर में घटना हुई, वहीं आरोपी का निवास भी है। ऐसे में इस चरण पर जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता। गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह इस मामले में 2 जून 2026 से भोपाल सेंट्रल जेल में बंद हैं। इससे पहले दोनों से सीबीआई ने पूछताछ की थी और रिमांड पूरी होने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। अदालत के इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल दोनों को जेल में ही रहना होगा, जबकि मामले की जांच आगे बढ़ती रहेगी।

 वॉयस सैंपल को लेकर भी बढ़ी मुश्किल

इस मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने अदालत को बताया था कि जांच के दौरान दोनों आरोपियों ने पूरी तरह सहयोग नहीं किया। जानकारी के अनुसार, 6 जुलाई को वॉयस सैंपल लेने की प्रक्रिया के समय समर्थ सिंह ने सैंपल देने से इनकार कर दिया था। वहीं गिरिबाला सिंह ने शुरुआत में एक सैंपल दिया, लेकिन बाद में प्रक्रिया आगे बढ़ाने से मना कर दिया। पीड़ित पक्ष के वकील का भी कहना है कि जांच में पूरा सहयोग नहीं मिलने के कारण कई जरूरी पहलुओं की जांच प्रभावित हुई। इसी आधार पर सीबीआई ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए दोनों की हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ा दी थी। अब अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने से जांच एजेंसी को आगे की कार्रवाई के लिए और समय मिल गया है।

 12 मई की घटना के बाद बदल गई जांच की दिशा

ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। शुरुआत में ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, लेकिन मायके वालों ने इस दावे को स्वीकार नहीं किया और हत्या का आरोप लगाया। परिवार का कहना था कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए गए। विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए एम्स दिल्ली से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया। इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और जांच की दिशा बदल गई। परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।

सीबीआई कर रही हर पहलू की जांच

हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई को इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी। जांच एजेंसी अब फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और गवाहों के बयानों सहित सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध सबूतों के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर आगामी सुनवाई और सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। पीड़ित परिवार भी उम्मीद लगाए बैठा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और सच्चाई जल्द सामने आएगी।

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