MP Waqf Board News: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नए गठन के साथ राज्य ने एक नया कदम उठाया है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 के प्रावधानों के तहत पहली बार बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किया गया है। इस बदलाव के बाद इंदौर के मनोज मालपानी और गुना जिले के राघौगढ़ निवासी अनिमेष भार्गव को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है। नए कानून के अनुसार अब हर राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का होना जरूरी है। इसी नियम को लागू करते हुए मध्य प्रदेश ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस फैसले के बाद दोनों नए सदस्यों की पृष्ठभूमि और उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
कौन हैं अनिमेष भार्गव?
अनिमेष भार्गव का संबंध गुना जिले के राघौगढ़ से है। उन्होंने एमबीए (फाइनेंस) की पढ़ाई की और लंबे समय तक निजी क्षेत्र में काम किया। वे एक निजी बैंक में मैनेजर के पद पर भी रहे, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर सार्वजनिक और संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हो गए। पिछले कई वर्षों से वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े विभिन्न दायित्व निभा रहे हैं और पार्टी के मीडिया पैनलिस्ट के रूप में भी अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक जीवन में आने से पहले उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में करीब 18 वर्षों तक काम किया। उनके परिवार का सामाजिक क्षेत्र में भी प्रभाव माना जाता है। अब वक्फ बोर्ड में सदस्य बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।
मनोज मालपानी लंबे समय से सामाजिक कार्यों में सक्रिय
वक्फ बोर्ड में शामिल दूसरे गैर-मुस्लिम सदस्य मनोज मालपानी इंदौर के निवासी हैं। वे लंबे समय से सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। छात्र जीवन से ही विभिन्न सामाजिक अभियानों में भाग लेने वाले मालपानी को प्रशासनिक और जनसंपर्क कार्यों का भी अनुभव है। बताया जाता है कि वे वर्षों से समाज सेवा और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। वक्फ से जुड़े मामलों की जानकारी और सामाजिक अनुभव को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। उनके नाम की घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो गया कि सरकार नए कानून के तहत बोर्ड में विविध प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहती है।
नए कानून के बाद बदली वक्फ बोर्ड की संरचना
वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 लागू होने के बाद मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की नई संरचना घोषित कर दी गई है। बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में सनवर पटेल को दोबारा जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा डॉ. नजमा हेपतुल्ला, आतिफ अकील, फैजान खान, फातेमा चौधरी, शाइस्ता सुल्तान, शबाना खान और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त को भी बोर्ड में स्थान दिया गया है। नए नियमों के तहत गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का उद्देश्य बोर्ड की संरचना को कानून के अनुरूप बनाना बताया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नए सदस्यों की मौजूदगी में बोर्ड किस तरह अपने प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाता है।
Read More-इंग्लैंड सीरीज से पहले टीम इंडिया में बड़ा झटका! चोटिल खिलाड़ी बाहर, 2 साल बाद इस ऑलराउंडर की एंट्री








