यूपी की सियासत में हलचल: सर्वे में 33 मंत्रियों पर जनता की नाराजगी, सिर्फ 3 को मिला दोबारा भरोसा!

यूपी की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। हाल ही में सामने आए एक बड़े सर्वे ने सरकार और संगठन दोनों के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार के 40 मंत्रियों में से 33 को जनता दोबारा विधायक के रूप में देखना पसंद नहीं कर रही है। वहीं केवल 3 मंत्री ऐसे हैं, जिनके कामकाज और छवि को लेकर जनता ने सकारात्मक राय दी है। बाकी कई मंत्रियों के बारे में जनता या तो नाखुश दिखी या फिर कोई स्पष्ट राय नहीं बना सकी। इस सर्वे के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा और तेज हो गई है।

कामकाज और व्यवहार पर उठे सवाल

सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि जनता की नाराजगी केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मंत्रियों के व्यवहार और काम करने के तरीके को भी इसमें बड़ी वजह माना जा रहा है। चार मंत्रियों को तो खासतौर पर उनके व्यवहार के चलते पूरी तरह से नकार दिया गया है। इनमें कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर, राज्य मंत्री मनोहर लाल ‘मन्नू कोरी’ और राज्य मंत्री दिनेश खटिक का नाम शामिल है। लोगों का कहना है कि जमीनी स्तर पर उनसे जुड़ी उम्मीदें पूरी नहीं हो सकीं, जिसका असर उनकी छवि पर पड़ा है।

योगी आदित्यनाथ की मजबूत लोकप्रियता

जहां मंत्रियों को लेकर जनता में नाराजगी दिखाई दे रही है, वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता अभी भी मजबूत बनी हुई है। उनके गढ़ गोरखपुर में सर्वे के मुताबिक करीब 89 प्रतिशत लोगों ने उन्हें दोबारा विधायक के रूप में देखना चाहा है। यही नहीं, वहां भारतीय जनता पार्टी को भी जनता की पहली पसंद बताया गया है। इससे साफ है कि जनता का भरोसा मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर कायम है, लेकिन मंत्रियों के कामकाज को लेकर असंतोष पार्टी के लिए चिंता का विषय जरूर बन सकता है।

तीन मंत्रियों को मिला समर्थन

सर्वे में केवल तीन मंत्रियों—नितिन अग्रवाल, राकेश निषाद और सतीश चंद्र शर्मा—को जनता का अच्छा समर्थन मिला है। वहीं दूसरी ओर कई सीटों पर राजनीतिक तस्वीर बदलती दिख रही है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत 9 मंत्रियों की सीटों पर समाजवादी पार्टी को बढ़त मिलती नजर आ रही है। हालांकि कुल मिलाकर 29 सीटों पर भाजपा अभी भी मजबूत स्थिति में है। लेकिन जनता की यह राय बताती है कि आने वाले चुनावों में टिकट वितरण और उम्मीदवारों के चयन में पार्टी को काफी सोच-समझकर कदम उठाने होंगे।

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