पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज कटाव ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रतुआ इलाके में करीब 150 साल पुराना शिव मंदिर देखते ही देखते नदी में समा गया। मंदिर के ढहने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें तेज बहाव के बीच पूरा मंदिर नदी में गिरता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि मंदिर पर पिछले साल से ही गंगा के कटाव का खतरा मंडरा रहा था। लंबे समय से आसपास के लोग इसे बचाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन आखिरकार तेज कटाव ने ऐतिहासिक मंदिर को अपने आगोश में ले लिया। मंदिर को अपनी आंखों के सामने गिरता देख स्थानीय लोग भावुक हो गए।
तेज बहाव के बीच बढ़ता गया गंगा का कटाव
जानकारी के मुताबिक, फरक्का बैराज से करीब 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का बहाव काफी तेज हो गया। इसका सीधा असर नदी के किनारे बसे इलाकों पर पड़ा और कटाव तेजी से बढ़ने लगा। इसी दौरान मंदिर के आसपास की जमीन भी कमजोर होती चली गई। आखिरकार नदी का पानी मंदिर के नीचे की जमीन को काटता हुआ आगे बढ़ा और इमारत ढहकर गंगा में समा गई। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। ऐतिहासिक मंदिर के इस तरह खत्म होने की तस्वीरें देखकर लोग भावुक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
100 से ज्यादा घर भी गंगा में समाए
मंदिर के अलावा रतुआ के कई इलाकों में भी गंगा का कटाव भारी तबाही मचा रहा है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार श्रीकांतटोला, जित्तूटोला और मुनिरामटोला समेत आसपास के इलाकों में 100 से ज्यादा घर नदी की चपेट में आ चुके हैं। 7 सितंबर तक बढ़ता जलस्तर और लगातार हो रहा कटाव स्थानीय लोगों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ वैकल्पिक तटबंध और सड़क संपर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
राहत कैंपों में भेजे गए सैकड़ों लोग
बढ़ते खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों और केंद्रीय बलों की मदद ली जा रही है। भुटनी द्वीप तक संपर्क बहाल करने के लिए अस्थायी रास्ता तैयार करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। प्रशासन के अनुसार रतुआ के 1,725 लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया है, जबकि 63 परिवारों को खसकोल हाई स्कूल में शेल्टर दिया गया है। ऐतिहासिक शिव मंदिर के गंगा में समाने के बाद लोगों में डर और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि अगर कटाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में और घरों के साथ सड़क और अन्य जरूरी ढांचा भी इसकी चपेट में आ सकता है।
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