प्रयागराज में दर्ज चर्चित ट्रेन हमले के मामले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत मिलने की खबर सामने आई है। उनके मीडिया प्रभारी की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि पुलिस जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को आधारहीन पाया गया है और उन्हें क्लीन चिट दे दी गई है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आ गया जब जीआरपी अधिकारियों ने ऐसी किसी आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। ऐसे में मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है और लोगों के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं।
आखिर क्या था ट्रेन हमले का मामला?
यह मामला मार्च 2026 में उस समय सामने आया था जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने आरोप लगाया था कि रीवा एक्सप्रेस ट्रेन में उनके ऊपर जानलेवा हमला किया गया। उनके अनुसार, वह गाजियाबाद से प्रयागराज की यात्रा कर रहे थे और सिराथू स्टेशन के पास एक अज्ञात व्यक्ति ने धारदार हथियार से उन पर हमला करने की कोशिश की थी। उन्होंने दावा किया था कि हमलावर ने उनकी नाक काटने का प्रयास किया। इस घटना के बाद आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। आरोप गंभीर होने के कारण मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया और धार्मिक व सामाजिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा हुई।
मीडिया प्रभारी का दावा, जांच में आरोप निकले गलत
शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मामले की जांच के दौरान लगाए गए आरोपों की गहन पड़ताल की गई। जांच में कथित हमले से जुड़ी कहानी और आरोपों को प्रमाणित करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। विज्ञप्ति में दावा किया गया कि पूरा मामला मनगढ़ंत और झूठा साबित हुआ है, जिसके बाद शंकराचार्य और उनके सहयोगियों को राहत मिल गई है। इस दावे के बाद उनके समर्थकों ने इसे सत्य की जीत बताया। वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे विवाद पूरी तरह खत्म होता नहीं दिख रहा।
जीआरपी के बयान से बढ़ा रहस्य
मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस तब पैदा हुआ जब जीआरपी प्रयागराज के अधिकारियों ने क्लीन चिट और फाइनल रिपोर्ट की जानकारी होने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो इसकी औपचारिक जानकारी कब सामने आएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद कई विवादों को लेकर चर्चा में रहे हैं। प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शाही स्नान को लेकर उनका प्रशासन और पुलिस से विवाद हुआ था, जिसके बाद उन्होंने धरना भी दिया था। इसी दौरान आशुतोष ब्रह्मचारी ने उन पर अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे। अब ट्रेन हमले के मामले में सामने आए नए दावों और पुलिस के अलग रुख ने पूरे प्रकरण को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की आधिकारिक रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के बयान इस मामले की वास्तविक स्थिति को और स्पष्ट कर सकते हैं।
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