Jammu Kashmir News: जम्मू-कश्मीर के रामनगर-उधमपुर हाईवे पर सोमवार सुबह एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया, जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। कानोटे गांव के पास यात्रियों से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर पहाड़ी से नीचे गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि मौके पर चीख-पुकार मच गई और आसपास का माहौल अफरा-तफरी में बदल गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसारअभी तक इस हादसे में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। स्थानीय लोग और प्रशासन तुरंत राहत कार्य में जुट गए हैं।
राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए और तुरंत बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। कुछ यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की तैयारी भी की जा रही है। दुर्घटना स्थल पर राहत कार्य में स्थानीय लोग भी प्रशासन की मदद कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया
इस हादसे को लेकर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है और घटना की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने उधमपुर के डीसी मिंगा शेरपा से बात की है और पूरे हालात पर नजर रखी जा रही है। मंत्री ने कहा कि बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया है और हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि गंभीर रूप से घायल यात्रियों को एयरलिफ्ट करने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उन्हें समय पर बेहतर इलाज मिल सके। प्रशासन लगातार स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
इलाके में शोक और चिंता का माहौल
इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह इलाका पहाड़ी और जोखिम भरा है, जहां पहले भी सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है कि बस कैसे नियंत्रण खो बैठी और इतनी बड़ी दुर्घटना कैसे हुई। संभावना जताई जा रही है कि तकनीकी खराबी या सड़क की स्थिति भी इस हादसे का कारण हो सकती है। प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच के आदेश दिए जा सकते हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। फिलहाल पूरा ध्यान बचाव कार्य और घायलों की जान बचाने पर केंद्रित है।
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