मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों और संबंधित मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जितने भी जटिल हों, उनका असर भारत के आम नागरिकों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्राथमिकता देशवासियों की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके लिए सभी मंत्रालयों को लगातार हालात पर नजर रखने और किसी भी संभावित संकट के लिए पहले से तैयार रहने को कहा गया है।
तेल-गैस और जरूरी चीजों की सप्लाई पर खास निगरानी
कैबिनेट बैठक में खास तौर पर ऊर्जा और सप्लाई से जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। मिडिल ईस्ट क्षेत्र दुनिया में कच्चे तेल और गैस का बड़ा स्रोत है, इसलिए वहां तनाव बढ़ने से वैश्विक बाजार प्रभावित हो सकता है। प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम, वित्त, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय को मिलकर काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि तेल और गैस की आपूर्ति में किसी तरह की कमी न आए। साथ ही सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि महंगाई का दबाव आम लोगों तक न पहुंचे। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि अगर जरूरत पड़े तो वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति की व्यवस्था पहले से तैयार रखी जाए। इसके अलावा खाद्य पदार्थों, दवाओं और अन्य जरूरी सामान की सप्लाई चेन पर भी लगातार नजर रखने के लिए कहा गया है।
जल जीवन मिशन को मिला बड़ा विस्तार
कैबिनेट बैठक में ग्रामीण भारत से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया। सरकार ने *जल जीवन मिशन* को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। सरकार का मानना है कि यह मिशन गांवों में रहने वाले करोड़ों लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। योजना के तहत अब तक करोड़ों घरों को नल कनेक्शन मिल चुका है, जिससे महिलाओं और बच्चों को पानी लाने की परेशानी से राहत मिली है। मिशन के विस्तार के साथ सरकार अब पानी की गुणवत्ता, नियमित सप्लाई और पाइपलाइन नेटवर्क को मजबूत करने पर भी जोर देगी ताकि गांवों में रहने वाले लोगों को लंबे समय तक साफ पानी उपलब्ध हो सके।
सरकार की तैयारी: संकट में भी जनता को राहत
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारत का यह कदम काफी अहम है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर न पड़े। इसी कारण सरकार ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य आपूर्ति और विकास योजनाओं पर समान रूप से ध्यान दे रही है। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि वे अपने-अपने विभागों में समन्वय बनाकर काम करें और जनता से जुड़े हर मुद्दे पर संवेदनशीलता दिखाएं। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि आने वाले समय में सरकार जरूरत के अनुसार और भी बड़े फैसले ले सकती है, ताकि देश की आर्थिक स्थिरता और विकास की गति बनी रहे।








