क्या नशे में पायलट ने उड़ाई थी एयर इंडिया की टर्बुलेंस वाली फ्लाइट, डोप टेस्ट होते ही मचा हड़कंप

Air India Turbulence: 4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की फ्लाइट में अचानक तेज टर्बुलेंस हुआ था। विमान करीब 300 फीट नीचे आ गया और दिल्ली पहुंचने के बाद 17 यात्रियों व क्रू सदस्यों को अस्पताल ले जाना पड़ा। अब जांच के दौरान फ्लाइट के एक पायलट की डोप टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी सामने आई है।

टर्बुलेंस के बाद दोनों पायलटों का हुआ टेस्ट

4 अगस्त को फुकेट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट को ओडिशा के पास अचानक तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। झटके इतने तेज थे कि विमान कुछ ही समय में करीब 300 फीट नीचे आ गया। इस दौरान यात्रियों के बीच अफरा-तफरी मच गई थी। घटना के बाद विमान के अंदर के कई वीडियो भी सामने आए थे। दिल्ली पहुंचने पर यात्रियों और क्रू की जांच कराई गई। इसी घटना के बाद विमान में मौजूद दोनों पायलटों का साइकोएक्टिव पदार्थों के लिए डोप टेस्ट कराया गया।

पायलट-इन-कमांड की पहली रिपोर्ट आई पॉजिटिव

सूत्रों के मुताबिक, इस टेस्ट में विमान के पायलट-इन-कमांड की शुरुआती रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। हालांकि, इसे अभी अंतिम नतीजा नहीं माना जा रहा है। मामले की पुष्टि के लिए दूसरा टेस्ट भी कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है। जांच पूरी होने तक दोनों पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। यानी अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पायलट ने नशे की हालत में ही विमान उड़ाया था। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और टेस्ट की पूरी रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।

17 लोगों को पहुंचाया गया था अस्पताल

इस घटना के बाद दिल्ली पहुंचने पर 13 यात्रियों और चार क्रू सदस्यों को अस्पताल ले जाया गया था। अब इस पूरे मामले की जांच नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA कर रहा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि टर्बुलेंस के दौरान पायलटों ने सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया था या नहीं। इसके अलावा विमान में किसी तकनीकी खराबी की संभावना को भी जांचा जा रहा है। यह सवाल भी जांच का हिस्सा है कि ऐसी स्थिति में विमान को दिल्ली ले जाना सही फैसला था या उसे लखनऊ, वाराणसी जैसे नजदीकी एयरपोर्ट पर उतारना बेहतर होता।

पॉजिटिव टेस्ट पर क्या हो सकती है कार्रवाई?

DGCA के नियमों के तहत पायलटों के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों से जुड़े टेस्ट की व्यवस्था है। पहली बार टेस्ट पॉजिटिव आने पर पायलट को आगे की जांच, मेडिकल प्रक्रिया और जरूरत पड़ने पर नशामुक्ति व पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना पड़ सकता है। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार फिटनेस की जांच होती है। अगर भविष्य में दोबारा ऐसा मामला सामने आता है तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं अंतरराष्ट्रीय विमानन नियम भी पायलट को ऐसे किसी पदार्थ के प्रभाव में उड़ान भरने की अनुमति नहीं देते, जिससे उसकी विमान उड़ाने की क्षमता प्रभावित हो। फिलहाल एयर इंडिया की इस फ्लाइट से जुड़े मामले में अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

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