11 अगस्त से दूध के दाम बढ़ेंगे, अब इतनी कीमत चुकानी होगी; जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Milk Price Hike: महाराष्ट्र में मंगलवार यानी 11 अगस्त से दूध की नई कीमतें लागू होने की जानकारी सामने आई है। मिल्क प्रोड्यूसर्स एंड प्रोसेसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में राज्य की प्रमुख सहकारी और निजी डेयरियों ने दूध के दाम बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके तहत गाय और भैंस दोनों के दूध की कीमत में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया जाएगा। बढ़ोतरी के बाद महाराष्ट्र में गाय के दूध की कीमत 62 रुपये प्रति लीटर, जबकि भैंस के दूध की कीमत 78 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाएगी। ऐसे में रोजाना दूध खरीदने वाले परिवारों को अब हर महीने पहले की तुलना में ज्यादा खर्च करना पड़ेगा।

दूध के साथ इन चीजों पर भी बढ़ सकता है खर्च

दूध की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ दूध तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। एसोसिएशन की ओर से बताया गया है कि दूध से बनने वाले कई उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। इनमें दही, छाछ, पनीर और घी शामिल हैं। इन उत्पादों की कीमतों में करीब 10 फीसदी तक वृद्धि की संभावना जताई गई है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले कीमत बढ़ने से लोगों की चिंता बढ़ सकती है। खासकर मिठाई और डेयरी उत्पाद बनाने वाले कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। दूध रोजमर्रा की जरूरत है, इसलिए इसकी कीमत में मामूली बढ़ोतरी भी लंबे समय में परिवार के बजट पर असर डाल सकती है।

डीजल और पैकेजिंग खर्च बढ़ने का दिया गया हवाला

दूध के दाम बढ़ाने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। एसोसिएशन के अनुसार, डीजल की कीमत में करीब 10 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे दूध को डेयरी और बाजार तक पहुंचाने का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा दूध के पैकेट और दूसरे पैकेजिंग सामान की लागत में भी करीब 30 फीसदी तक वृद्धि बताई गई है। दूध खरीदने की लागत बढ़ने से किसानों और डेयरी कारोबारियों पर भी आर्थिक दबाव बढ़ा है। इन बढ़े हुए खर्चों को देखते हुए दूध की कीमत में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।

दूध की कीमत तय करने में सरकार की क्या भूमिका है?

पिछले महीने लोकसभा में सरकार से दूध की कीमतों को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके लिखित जवाब में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया था कि दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। दूध की कीमतें बाजार की स्थिति के आधार पर सहकारी समितियों और निजी डेयरियों द्वारा तय की जाती हैं। सरकार की ओर से डेयरी किसानों के हितों को सुरक्षित रखने, दूध की कीमतों में स्थिरता बनाए रखने और दूध की गुणवत्ता की निगरानी बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए जाने की बात कही गई है। अब महाराष्ट्र में 11 अगस्त से लागू होने वाली नई कीमतों का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर देखने को मिलेगा।

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