जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। राजधानी दिल्ली में हुई इस बैठक में जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सबसे प्रमुख मुद्दा केंद्र शासित प्रदेश का राज्य का दर्जा बहाल करना रहा। इसके अलावा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े नियम, आरक्षण में बदलाव और प्रदेश में विकास एवं जनकल्याण से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई।
राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा फिर केंद्र में
उमर अब्दुल्ला लंबे समय से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की मांग करते रहे हैं। 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन भी उन्होंने दिल्ली में इस मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद अमित शाह के साथ यह उनकी पहली मुलाकात बताई जा रही है। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान खत्म करने के साथ जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए थे। केंद्र सरकार पहले भी कह चुकी है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।
प्रशासनिक नियमों को लेकर भी हुई चर्चा
बैठक में सिर्फ राज्य के दर्जे का मुद्दा ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी बात हुई। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार मौजूदा व्यवस्था में सामने आ रही प्रशासनिक चुनौतियों को कई बार उठा चुकी है। बैठक में शासन व्यवस्था से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई, ताकि जम्मू-कश्मीर में सरकार और प्रशासन के कामकाज को ज्यादा सुचारू बनाया जा सके। इसके साथ ही प्रदेश में जनकल्याण योजनाओं और प्रशासनिक दक्षता से जुड़े विषय भी बातचीत का हिस्सा रहे।
आरक्षण और विकास के मुद्दे भी एजेंडे में
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से बैठक के बाद बताया गया कि आरक्षण व्यवस्था के युक्तिकरण पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों और आम लोगों से जुड़े कल्याणकारी मुद्दों को लेकर भी दोनों नेताओं ने बातचीत की। माना जा रहा है कि उमर अब्दुल्ला ने केंद्र के सामने प्रदेश की मौजूदा जरूरतों और सरकार के सामने आ रही चुनौतियों को रखा। बैठक में उठाए गए मुद्दे जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था से सीधे जुड़े हैं।
उमर सरकार की मांग पर अब केंद्र के रुख पर नजर
अमित शाह और उमर अब्दुल्ला की इस मुलाकात को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में लगातार प्रमुख बना हुआ है। मुख्यमंत्री पहले भी इस मांग को सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं। हालांकि, बैठक के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र की ओर से कोई नई समयसीमा घोषित नहीं की गई है। ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले समय में केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और जम्मू-कश्मीर की सरकार की मांग किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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