Saturday, January 17, 2026

सीमा सुरक्षा से समझौता नहीं! शराबी जवानों के खिलाफ होगा ये बड़ा एक्शन, अभियान शुरू

नेपाल और भूटान से लगी भारत की संवेदनशील और बाड़ रहित अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा करने वाले सशस्त्र सीमा बल (SSB) में एक बड़ी आंतरिक कार्रवाई ने सबका ध्यान खींचा है। बल ने अपने उन जवानों के खिलाफ अभियान शुरू किया है जो लंबे समय से शराब की गंभीर लत से जूझ रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम 50 ऐसे मामलों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें जवानों को शराब निर्भरता सिंड्रोम यानी एडीएस से पीड़ित पाया गया है। यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से मिल रही शिकायतों, मेडिकल रिपोर्ट और अनुशासनात्मक आकलन के बाद की गई है। SSB का मानना है कि सीमा सुरक्षा जैसे जिम्मेदार कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही या मानसिक अस्थिरता देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है, इसलिए अब इस मुद्दे पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।

मेडिकल जांच से लेकर पिंक स्लिप तक, पूरी प्रक्रिया सख्त

SSB अधिकारियों ने साफ किया है कि यह कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर नहीं की जा रही। जिन जवानों पर शराब की अत्यधिक लत का शक था, उनकी पहले विस्तृत मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद कानूनी और विभागीय प्रक्रियाओं का पालन किया गया। अब तक 8 से 10 कर्मियों को सभी औपचारिकताओं के बाद पिंक स्लिप दी जा चुकी है, यानी उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। बाकी मामलों में भी समान प्रक्रिया जारी है। जिन जवानों को एडीएस श्रेणी में रखा गया है, उनकी मेडिकल कैटेगरी को ‘फिट’ से नीचे कर दिया गया है और उन्हें लो मेडिकल कैटेगरी (LMC) में डाल दिया गया है। इसका सीधा मतलब है कि ऐसे जवानों को न तो ऑपरेशनल ड्यूटी दी जा रही है और न ही हथियारों से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

हथियारों के बीच नशे की लत, क्यों माना गया बड़ा खतरा

SSB का तर्क है कि शराब की गंभीर लत से पीड़ित जवान न केवल खुद के लिए, बल्कि अपने साथियों और आम नागरिकों के लिए भी खतरा बन सकते हैं। जब ऐसे जवानों को शराब उपलब्ध नहीं होती, तो उनमें चिड़चिड़ापन, आक्रामकता और असंतुलित व्यवहार देखा गया है। खास बात यह है कि SSB की हर यूनिट के कैंप में हथियार मौजूद रहते हैं। ऐसे में मानसिक रूप से अस्थिर या नशे की लत से जूझ रहे जवानों का हथियारों के संपर्क में रहना किसी भी समय बड़ी घटना का कारण बन सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए बल के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि सुधार के तमाम प्रयासों के बावजूद यदि कोई जवान ड्यूटी के लिए सुरक्षित नहीं है, तो उसे बल में बनाए रखना ठीक नहीं होगा।

नेपाल-भूटान सीमा की जिम्मेदारी और DG का सख्त संदेश

SSB के महानिदेशक संजय सिंघल ने इस पूरे मामले में समयबद्ध और निर्णायक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि सीमा सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। लगभग 90 हजार जवानों वाला यह बल नेपाल के साथ 1,751 किलोमीटर और भूटान के साथ 699 किलोमीटर लंबी बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करता है। यह इलाका तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य सुरक्षा चुनौतियों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में हर जवान का मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट होना जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर और मामलों की पहचान की जाएगी। SSB का यह कदम न सिर्फ अनुशासन का संदेश देता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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