तेज बुखार में परीक्षा देने वाली निकिता का रिजल्ट आया, 93% अंक के साथ मिली जीत लेकिन हार गई जिंदगी 

श्रीगंगानगर के रावला गांव की निकिता ने इस साल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा कला वर्ग में दी। परिजन बताते हैं कि परीक्षा के दौरान ही निकिता को तेज बुखार हो गया था। बावजूद इसके उसने हिम्मत दिखाई और परीक्षा दी। निकिता का सपना कलेक्टर बनना था और वह पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहती थी। निकिता के पिता मंगल सिंह ने बताया कि बेटी के बीमार होने के बावजूद परीक्षा देने का साहस देखकर परिवार बहुत गर्व महसूस करता है। परीक्षा के बाद उसका स्वास्थ्य और बिगड़ गया और उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।

इलाज के दौरान बिगड़ी तबियत और अंतिम सांसे

परीक्षा देने के कुछ दिन बाद निकिता की तबियत गंभीर रूप से बिगड़ गई। परिवार ने उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन हालत स्थिर न होने पर डॉक्टरों ने उसे बीकानेर रेफर कर दिया। बीकानेर में निकिता का इलाज किया गया, लेकिन तेज बुखार और डायबटीज के चलते उसकी हालत और बिगड़ गई। डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद निकिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया। परिजन बताते हैं कि तेज बुखार, पीलिया और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं ने उसकी जान ले ली। निकिता की मौत परीक्षा रिजल्ट आने से 20 दिन पहले हो गई थी।

रिजल्ट में मिली 93.80% अंक की शानदार उपलब्धि

मंगलवार को राजस्थान बोर्ड का 12वीं रिजल्ट घोषित हुआ। निकिता के नाम 93.80% अंक दर्ज हुए। रिजल्ट आने के बाद तमाम बच्चों के घर खुशी का माहौल था, लेकिन निकिता के परिवार में मातम छा गया। परिजन बताते हैं कि निकिता पढ़ाई में हमेशा होनहार थी और कला वर्ग में उसकी यह सफलता दिखाती है कि उसने परीक्षा में बीमारी के बावजूद अपना बेस्ट दिया। परिवार अब उसकी मेहनत और उपलब्धि को याद कर भावुक है।

परिवार और बहनों की भावनाएं

निकिता के पिता मंगल सिंह और माता चरनजीत कोर ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में होनहार थी और हमेशा परिवार का नाम रोशन करती थी। निकिता की दो बहनें और एक भाई हैं। बड़ी बहन भिंदर कोर बीएसटीसी कर रही है, छोटी बहन निशु कक्षा 10 पास कर चुकी है और छोटा भाई अरमान सिंह कक्षा 8वीं पास है।

परिवार के अनुसार, निकिता ने परीक्षा के दौरान भी अपनी जिम्मेदारी नहीं छोड़ी और बुखार में पेपर देकर अपनी मेहनत साबित की। परिवार इस उपलब्धि और बेटी की मेहनत पर गर्व करता है, लेकिन उनकी मौत की वजह से खुशी में गम भी शामिल है।  निकिता की कहानी न केवल शिक्षा और मेहनत की प्रेरणा है, बल्कि यह भी दिखाती है कि हिम्मत और लगन से बड़ी मुश्किलों के बावजूद सफलता हासिल की जा सकती है।

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