मजदूरी करने वाले युवक के खाते में कैसे घूम गए 41 करोड़ रुपये? आयकर विभाग के नोटिस ने उड़ाए होश

Mirzapur News: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। रोज मेहनत-मजदूरी करके परिवार का गुजारा करने वाले एक युवक को आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की ओर से नोटिस मिला है। नोटिस में उसके बैंक खाते से करोड़ों रुपये के लेन-देन का जिक्र किया गया है। यह जानकारी सामने आने के बाद युवक और उसके परिवार के होश उड़ गए। परिवार का कहना है कि वे साधारण जीवन जीते हैं और दिनभर मजदूरी करके घर चलाते हैं। ऐसे में उनके खाते से 41 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात समझ से परे है। मामला सामने आने के बाद इलाके में भी इसकी चर्चा शुरू हो गई है और लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर एक मजदूर के खाते में इतनी बड़ी रकम का लेन-देन कैसे दिखाया गया।

नौकरी के नाम पर खुलवाया गया था बैंक खाता

मिर्जापुर के पड़री थाना क्षेत्र के लोकापुर गांव निवासी श्याम बाबू बिंद ने बताया कि कुछ वर्ष पहले वह रोजगार की तलाश में दिल्ली गए थे। वहां उनके एक रिश्तेदार ने उन्हें बताया कि नौकरी पाने के लिए बैंक खाता होना जरूरी है। इसी बात पर भरोसा करके उन्होंने एक बैंक खाता खुलवाया। लेकिन बाद में उन्हें नौकरी नहीं मिली और वह वापस अपने गांव लौट आए। श्याम बाबू का आरोप है कि घर लौटने के बाद उन्होंने कई बार बैंक से जुड़े दस्तावेज और पासबुक मांगी, लेकिन उन्हें नहीं दी गई। समय बीतता गया और उन्होंने इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। अब कई साल बाद जब विभागीय नोटिस उनके घर पहुंची तो उन्हें पता चला कि उनके नाम से करोड़ों रुपये का लेन-देन दर्ज है।

41 करोड़ रुपये के लेन-देन का दावा, युवक ने जताई हैरानी

श्याम बाबू का कहना है कि वह एक दिहाड़ी मजदूर हैं और उनकी आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य है। ऐसे में उनके खाते से 41 करोड़ रुपये का कारोबार होना संभव ही नहीं है। नोटिस मिलने के बाद उन्होंने दस्तावेजों को देखा तो पता चला कि उनके खाते के जरिए बड़ी रकम का लेन-देन दिखाया गया है। इससे पूरा परिवार चिंता में है। युवक का आरोप है कि किसी ने उनके बैंक खाते का गलत इस्तेमाल किया है। उन्हें आशंका है कि नौकरी दिलाने के बहाने खुलवाए गए खाते का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति ने वित्तीय गतिविधियों के लिए किया होगा। इस मामले ने बैंकिंग सुरक्षा और लोगों की जागरूकता को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग नौकरी या अन्य जरूरतों के नाम पर अपने दस्तावेज दूसरों को सौंप देते हैं, जिसका बाद में गलत फायदा उठाया जा सकता है।

पुलिस अधीक्षक से लगाई जांच की गुहार

मामले को लेकर श्याम बाबू ने पहले स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि वहां से उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यह पता लगाया जाए कि उनके खाते का इस्तेमाल किसने और किस उद्देश्य से किया। साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल प्रशासनिक और जांच एजेंसियों की ओर से मामले की पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में खाते के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो यह मामला बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के रूप में सामने आ सकता है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर है, जिससे यह साफ हो सके कि एक साधारण मजदूर के खाते में करोड़ों रुपये के लेन-देन की कहानी आखिर कैसे बनी।

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