10 मौतों के बाद खुला बड़ा राज! भिवंडी बिल्डिंग हादसे में आखिर किसकी लापरवाही ने ली मासूमों की जान?

महाराष्ट्र के भिवंडी में हुई दर्दनाक बिल्डिंग दुर्घटना के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कोहिनूर इमारत गिरने के मामले में बिल्डिंग मालिक और मरम्मत का काम करने वाले ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। इस हादसे में 10 लोगों की जान चली गई, जबकि तीन लोग अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। नगर निगम की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। आरोप है कि बिना जरूरी अनुमति के निर्माण और मरम्मत का काम कराया गया, जिससे इमारत की मजबूती पर गंभीर असर पड़ा। इस घटना के बाद इलाके में लोगों में भारी नाराजगी है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

जांच में सामने आई लापरवाही

प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इमारत में नियमों का पालन किए बिना निर्माण और मरम्मत का काम कराया जा रहा था। शिकायत के अनुसार बिल्डिंग मालिक पर बिना आवश्यक मंजूरी के निर्माण कराने का आरोप लगाया गया है। वहीं, पिलरों की मरम्मत करने वाले ठेकेदार की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने अवैध निर्माण और निगरानी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 पहले ही खतरनाक घोषित हो चुकी थी इमारत

जानकारी के अनुसार यह चार मंजिला कोहिनूर इमारत पहले ही नगर निगम की ओर से खतरनाक घोषित की जा चुकी थी। इसके बावजूद भवन में कई परिवार रह रहे थे और उसी दौरान मरम्मत का कार्य भी जारी था। देर रात अचानक इमारत का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया, जिससे कई लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव टीमों ने घंटों तक अभियान चलाकर लोगों को बाहर निकाला। हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोगों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घायल लोगों का अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इमारत खाली करा दी जाती तो इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी।

 हादसे के बाद उठे बड़े सवाल

इस दुर्घटना ने एक बार फिर पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई ऐसी इमारतें अब भी मौजूद हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया जा चुका है, लेकिन उनमें लोग रहने को मजबूर हैं। हादसे के बाद प्रशासन पर ऐसी इमारतों की दोबारा जांच करने और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का दबाव बढ़ गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर किसकी लापरवाही के कारण इतना बड़ा हादसा हुआ। लोगों की मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा मिले ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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