CJP आंदोलन के ‘जुनैद भाई’ आखिर क्यों पहुंचे सुप्रीम कोर्ट? याचिका में लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP प्रदर्शन के दौरान चर्चा में आए मोहम्मद जुनैद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। उन्होंने अदालत में एक याचिका दायर कर दावा किया है कि प्रदर्शन खत्म होने के बाद उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। याचिका में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से मामले में हस्तक्षेप करने और उन्हें कानूनी सुरक्षा देने की मांग की है। जुनैद का कहना है कि उनके साथ हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उनके परिवार को किसी भी तरह के कथित उत्पीड़न से राहत दिलाई जाए। उनके अदालत पहुंचने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

याचिका में लगाए पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोप

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मोहम्मद जुनैद ने आरोप लगाया है कि उन्हें दिल्ली से पुलिस अपने साथ ले गई और कई घंटे तक अपने पास रखने के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया गया। उनका दावा है कि इस दौरान उन्हें धमकाया गया। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके पिता और बहन के ससुराल पक्ष के लोगों को भी परेशान किया गया। जुनैद के अनुसार, उनके परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पुलिस एजेंसियों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे मामलों में अंतिम स्थिति अदालत में पेश होने वाले दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

कौन हैं मोहम्मद जुनैद, कैसे आए चर्चा में?

मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव के रहने वाले हैं। CJP आंदोलन के शुरुआती दिनों में वे सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते थे। उनका मुख्य काम प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं के लिए भोजन, पानी और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं करना था। आंदोलन में भाग लेने वाले लोग उन्हें धीरे-धीरे ‘जुनैद भाई’ के नाम से पहचानने लगे। हालांकि उन्होंने संगठन में कोई आधिकारिक पद नहीं संभाला, लेकिन प्रदर्शन के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका के कारण वे आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। खासकर प्रदर्शन स्थल पर लगातार सेवाएं देने के कारण उनका नाम सोशल मीडिया और समाचारों में भी सामने आने लगा।

घर पर तलाशी के बाद बढ़ी चर्चा, पुलिस का भी आया पक्ष

मोहम्मद जुनैद का नाम उस समय और अधिक सुर्खियों में आया जब पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी ली। परिवार का आरोप है कि इस दौरान उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया और बैंक पासबुक, पैन कार्ड सहित कुछ दस्तावेज अपने कब्जे में लिए गए। परिवार ने यह भी दावा किया कि मेरठ में रहने वाले रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई। दूसरी ओर, मेरठ पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि जिले के किसी भी थाने में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ कार्रवाई का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, इसलिए आगे की दिशा अदालत की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब पर निर्भर करेगी। इस मामले पर आने वाले दिनों में कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

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