16 दिन तक चलता रहा जल सत्याग्रह, फिर अचानक पहुंची पुलिस… केन-बेतवा आंदोलन के अंत की पूरी कहानी

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 16 दिनों से जारी आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया। बराना नदी के किनारे जल सत्याग्रह और अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने मौके से हटाकर अस्पताल भेज दिया। प्रशासन का कहना है कि लगातार अनशन और बढ़ते जलस्तर के कारण आंदोलनकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया। अधिकारियों के अनुसार प्रदर्शनकारियों की तबीयत खराब होने की आशंका थी, इसलिए उनका मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, आंदोलन में शामिल महिलाओं को बसों के जरिए सुरक्षित उनके घर भेजा गया। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से की गई और किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई।

पुनर्वास की मांग को लेकर शुरू हुआ था आंदोलन

केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने पुनर्वास और मुआवजे को लेकर जो वादे किए थे, वे अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। इसी मांग को लेकर प्रभावित ग्रामीण और आदिवासी समुदाय के लोग लगातार आंदोलन कर रहे थे। छतरपुर जिले के कूपी गांव के पास बराना नदी के तट पर शुरू हुआ यह प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़ा जनआंदोलन बन गया। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जल सत्याग्रह के साथ-साथ चिता सत्याग्रह और प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाए। आंदोलन का नेतृत्व सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर कर रहे थे, जो कई दिनों से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि आंदोलन के दौरान उनकी स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया और नियमित चिकित्सकीय जांच भी नहीं कराई गई।

प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य को बताया प्राथमिक कारण

प्रशासन की ओर से कहा गया कि लगातार बारिश के कारण बराना नदी का जलस्तर बढ़ रहा था, जिससे आंदोलन स्थल पर मौजूद लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। इसके अलावा निर्माणाधीन पुल के आसपास की स्थिति भी जोखिम भरी मानी जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक डॉक्टरों की टीम ने प्रदर्शनकारियों की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया और उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया गया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने भी स्वास्थ्य जांच के लिए सहमति जताई थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति के साथ बल प्रयोग नहीं किया गया और पूरी प्रक्रिया कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए पूरी की गई। हालांकि आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है।

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना और क्यों हो रहा है विरोध?

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना मानी जाती है, जिसे राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के तहत विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा नदी तक पहुंचाकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। सरकार का दावा है कि इससे लाखों किसानों को फायदा मिलेगा और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत मिलेगी। दूसरी ओर, परियोजना से प्रभावित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ विस्थापित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजे और आजीविका की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है। फिलहाल आंदोलन भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन प्रभावित लोगों की मांगें अब भी बनी हुई हैं। आने वाले समय में सरकार और प्रभावित पक्षों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर रहेगी।

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