मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट एक बार फिर वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद कर दिया है। दूसरी ओर, अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि जलमार्ग से व्यापारिक जहाजों का आवागमन सामान्य रूप से जारी है। दोनों देशों के विरोधाभासी बयानों ने दुनिया भर में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण वार्ता होने वाली है। ऐसे में कूटनीतिक प्रयासों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
ईरान ने लेबनान में इजरायली कार्रवाई को बताया वजह
ईरान का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में जारी इजरायली सैन्य कार्रवाई और हालिया समझौतों के कथित उल्लंघन के कारण उसे यह कदम उठाना पड़ा। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, देश के सैन्य नेतृत्व ने होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी है और जहाजों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। ईरान का आरोप है कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां युद्धविराम की शर्तों के खिलाफ हैं। तेहरान ने यह भी कहा है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ तो वह आगे और सख्त कदम उठा सकता है। हालांकि, ईरान के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
अमेरिका बोला- समुद्री यातायात पूरी तरह सामान्य
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रूप से गुजर रहे हैं और समुद्री सुरक्षा पर लगातार नजर रखी जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि जलडमरूमध्य को वास्तव में बंद कर दिया गया है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि हालिया समझौते के तहत क्षेत्र में समुद्री यातायात को सुचारु रखने पर सहमति बनी थी। अमेरिका का कहना है कि वह नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग बाधित होता है तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इस बीच, ईरान ने अमेरिका पर अंतरिम समझौते की शर्तों को पूरी तरह लागू नहीं करने का आरोप लगाया है। हालांकि तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के बावजूद दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में वार्ता के लिए पहुंच चुके हैं। अब पूरी दुनिया की नजर इस बातचीत पर है, क्योंकि इसके नतीजे न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार की दिशा भी तय कर सकते हैं।
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