प्रयागराज के ऐतिहासिक बड़े ताजिये पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला! अब उठेगा या नहीं, जिम्मेदारी किसकी?

प्रयागराज में मोहर्रम के दौरान निकलने वाले ऐतिहासिक बड़े ताजिये को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंचकर नया रूप ले चुका है। इस मामले में Allahabad High Court ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए साफ कर दिया है कि यह मामला किसी सरकारी हस्तक्षेप का नहीं बल्कि समाज के भीतर आपसी सहमति और परंपरा से जुड़ा विषय है। अदालत के सामने यह सवाल रखा गया था कि यदि ताजिया उठाने की जिम्मेदारी संभालने वाली संस्था इस बार पीछे हट रही है तो क्या जिला प्रशासन किसी अन्य व्यक्ति या समूह को इसकी अनुमति देकर परंपरा को जारी रख सकता है। हालांकि कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि जब प्रशासन को कोई आपत्ति नहीं है, तब अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं बनती।

 वर्षों पुरानी परंपरा पर संकट की आशंका क्यों पैदा हुई?

दरअसल, प्रयागराज में मोहर्रम के अवसर पर निकाला जाने वाला बड़ा ताजिया लंबे समय से एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है। बताया जाता है कि इसकी व्यवस्था और संचालन की जिम्मेदारी एक विशेष संस्था के पास रही है। इस वर्ष संबंधित संस्था के पदाधिकारी द्वारा ताजिया उठाने से इनकार किए जाने के बाद स्थिति जटिल हो गई। इसके बाद दूसरी सामाजिक संस्था ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि यदि मौजूदा जिम्मेदार लोग यह कार्य नहीं करना चाहते तो प्रशासन आगे बढ़कर व्यवस्था सुनिश्चित करे। याचिका में यह भी कहा गया कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो वर्षों से चली आ रही परंपरा टूट सकती है, जिससे समाज में निराशा का माहौल बन सकता है।

 सुनवाई के दौरान प्रशासन ने क्या रखा पक्ष?

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने जिला प्रशासन और सरकारी पक्ष से स्पष्ट जानकारी मांगी। प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया कि मोहर्रम के जुलूस या बड़े ताजिये के आयोजन पर किसी प्रकार की सरकारी रोक नहीं है। न तो प्रशासन ने कोई प्रतिबंध लगाया है और न ही कानून-व्यवस्था के आधार पर कोई आपत्ति दर्ज की गई है। इसके बाद अदालत ने यह भी गौर किया कि जिस संस्था के पास ताजिया उठाने की जिम्मेदारी है और जिस संस्था ने अदालत में याचिका दाखिल की है, दोनों अलग-अलग हैं। ऐसे में यह विवाद मुख्य रूप से समाज के अंदर विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएगी।

 हाईकोर्ट ने कहा- समाज खुद निकाले समाधान

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब किसी धार्मिक आयोजन पर प्रशासनिक प्रतिबंध नहीं है, तब अदालत किसी पक्ष को आदेश देकर परंपरा के संचालन का तरीका तय नहीं कर सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह समुदाय का आंतरिक विषय है और इसे संबंधित पक्षों को आपसी बातचीत और सहमति से सुलझाना चाहिए। कोर्ट ने किसी भी अतिरिक्त निर्देश देने से इनकार करते हुए याचिका का निस्तारण कर दिया। अब सभी की नजर इस बात पर है कि समाज के जिम्मेदार लोग मिलकर इस मुद्दे का समाधान कैसे निकालते हैं और क्या इस वर्ष भी मोहर्रम पर प्रयागराज का ऐतिहासिक बड़ा ताजिया पहले की तरह निकलेगा। फिलहाल अदालत के फैसले के बाद यह जिम्मेदारी पूरी तरह संबंधित पक्षों और समुदाय के प्रतिनिधियों पर आ गई है।

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