सांसद अनिल बलूनी की गाड़ी पर गिरा भारी बोल्डर, ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर बाल-बाल बचे

उत्तराखंड के पहाड़ी रास्तों पर सफर करना कितना खतरनाक हो सकता है, इसकी एक डरावनी बानगी ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर देखने को मिली है। यहाँ के बेहद संवेदनशील और भूस्खलन-प्रवण क्षेत्र टौताघाटी के पास गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सांसद अनिल बलूनी की गाड़ी पर अचानक पहाड़ी से एक विशालकाय बोल्डर आ गिरा। यह घटना इतनी अचानक और भयानक थी कि वहाँ अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि इस भीषण दुर्घटना में किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और सांसद समेत गाड़ी में सवार सभी लोग पूरी तरह सुरक्षित बच गए। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा और प्रशासन के इंतजामों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीपलकोटी टनल के निरीक्षण के लिए जा रहे थे सांसद

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद अनिल बलूनी अपने तयशुदा कार्यक्रम के तहत चमोली जिले के पीपलकोटी में निर्माणाधीन टनल का निरीक्षण करने के लिए जा रहे थे। यह टनल परियोजना क्षेत्र के विकास और यातायात को सुगम बनाने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जब उनका काफिला टौताघाटी के पास से गुजर रहा था, तभी पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक दरक गया और भारी-भरकम पत्थर सीधे उनकी चलती गाड़ी पर आ गिरा। वाहन को इस टक्कर से काफी नुकसान पहुँचा है, लेकिन भगवान की कृपा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के कारण अंदर बैठे लोगों पर कोई आँच नहीं आई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था।

हौसला नहीं टूटा, दुर्घटना के बाद भी जारी रखी यात्रा

इस बड़े हादसे के तुरंत बाद प्रारंभिक झटके से उबरते हुए सांसद अनिल बलूनी ने अपनी हिम्मत का परिचय दिया और यात्रा रोकने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने तय किया कि वे अपने निर्धारित कार्य को अधूरा नहीं छोड़ेंगे और तय कार्यक्रम के अनुसार पीपलकोटी टनल क्षेत्र पहुँचकर स्थिति का जायजा लेंगे। इस साहसिक कदम से यह साबित होता है कि तमाम प्रकार की प्राकृतिक आपदाओं और अनिश्चितताओं के बीच भी जन प्रतिनिधि अपने विकास कार्यों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। स्थानीय लोगों और समर्थकों ने सांसद और उनके दल के सकुशल होने पर गहरी राहत की सांस ली है।

चार धाम यात्रा मार्गों की सुरक्षा पर फिर उठे गंभीर सवाल

इस अप्रिय घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के चार धाम मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएँ पैदा कर दी हैं। टौताघाटी का क्षेत्र पहले से ही भूस्खलन (लैंडस्लाइड) के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है, जहाँ आए दिन पहाड़ी से पत्थर गिरने की खबरें सामने आती रहती हैं। मानसून या अन्य मौसमों में इन रास्तों पर सफर करना यात्रियों के लिए किसी जोखिम से खाली नहीं होता है। इस दुर्घटना के बाद अब यह मांग जोर पकड़ने लगी है कि इन संवेदनशील इलाकों में पुख्ता सुरक्षा दीवारें और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से वीवीआईपी और आम नागरिकों की जान को बचाया जा सके।

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