उत्तर प्रदेश के औरैया में करीब छह साल पुराने चर्चित डबल मर्डर केस में बुधवार, 19 अगस्त को अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। विशेष MP/MLA कोर्ट ने पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक समेत 11 आरोपियों को दोषी ठहराया। इनमें 10 दोषियों को हत्या के मामले में उम्रकैद और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा दी गई। कोर्ट के इस फैसले के बाद औरैया के इस चर्चित मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई का एक अहम पड़ाव पूरा हो गया है।
मंदिर में विवाद के बाद हुई थी दो लोगों की हत्या
यह पूरा मामला 15 मार्च 2020 का है। औरैया के पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में जमीन को लेकर विवाद हुआ था। इसी दौरान अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद मामला काफी चर्चा में आया और पुलिस ने कई लोगों को आरोपी बनाया। इसके बाद केस की सुनवाई विशेष MP/MLA कोर्ट में शुरू हुई। अदालत में अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अपनी-अपनी दलीलें और साक्ष्य पेश किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए लंबे समय तक सुनवाई चलती रही और आखिरकार कोर्ट ने आरोपियों को दोषी करार दिया।
900 से ज्यादा तारीखें, 72 गवाहों के बाद आया फैसला
इस केस की सुनवाई करीब 6 साल 5 महीने तक चली। इस दौरान अदालत में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और दोनों पक्षों की ओर से कुल 72 गवाह पेश किए गए। विशेष MP/MLA कोर्ट के न्यायाधीश विनय प्रकाश सिंह ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। पूर्व सपा MLC कमलेश पाठक का नाम औरैया की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली नेताओं में रहा है। वह कम उम्र में ही राजनीति में आए और विधायक बने। इसके बाद वह विधान परिषद सदस्य भी रहे। 1991 में उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री का पद मिला था। उन्होंने दिबियापुर विधानसभा सीट से 2002 में चुनाव जीता, जबकि बाद के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया और 2015 में वह फिर MLC बने। अब डबल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा के बाद उनकी राजनीतिक और कानूनी स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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