मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। बिना अनुमति के भारी भीड़ जुटाने और प्रदर्शन करने के आरोप में सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके समेत कई अन्य कार्यकर्ताओं पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत मुंबई की एक स्थानीय वकील और निवासी सिद्धि देवलेकर द्वारा शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है। शिकायकर्ता का आरोप है कि प्रशासन द्वारा साफ मना किए जाने के बावजूद नियमों की अनदेखी कर यह प्रदर्शन किया गया, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
अभिजीत दीपके का कड़ा रुख और पुलिस कार्रवाई
अपने ऊपर और अन्य साथियों (आशुतोष रांका, सौरव दास और रत्ना सिंह) पर केस दर्ज होने की खबरों के बाद CJP के मुख्य अभिजीत दीपके ने बेहद आक्रामक और बेबाक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि सरकार या स्थानीय लोग चाहे जितने मर्जी मामले दर्ज करवा लें, लेकिन युवाओं के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। दीपके ने बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वे देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए हरसंभव कीमत चुकाने को तैयार हैं और अपनी यह वैधानिक लड़ाई पूरी ताकत के साथ जारी रखेंगे।
प्रदर्शन की मुख्य मांगें और बॉलीवुड हस्तियों की मौजूदगी
आपको बता दें कि CJP के बैनर तले आयोजित इस बड़े प्रदर्शन का मुख्य केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। हालिया कथित चुनावी गड़बड़ियों के खुलासे के बाद संगठन ने यह कड़ा रुख अपनाया है। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में राजनीति के साथ-साथ कला जगत के कई दिग्गज चेहरे भी शामिल हुए, जिनमें जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, अभिनेत्री शबाना आजमी, निर्देशक विशाल भारद्वाज और संगीतकार विशाल ददलानी जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इसके अलावा CJP ने 2023 के विवादित कानून को रद्द करने और मतदाता सूची (SIR) को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करने की भी पुरजोर मांग उठाई है।
जंतर-मंतर 2.0 का ऐलान और आगे की रणनीति
मुंबई पुलिस द्वारा ध्वनि प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और स्थानीय नागरिकों की असुविधा का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद आयोजकों ने ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया था, जिसमें हजारों की संख्या में लोग उमड़े। अब इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अभिजीत दीपके ने शुक्रवार देर रात एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि यदि CEC ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो आगामी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘जंतर-मंतर 2.0’ के तहत एक और विशाल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने देश के हर उस नागरिक से इसमें शामिल होने की अपील की है जो निष्पक्ष चुनाव प्रणाली में विश्वास रखता है।
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