सोशल मीडिया आज के दौर में जितना काम का है, कई बार राजनीतिक द्वेष के चलते यह उतना ही जहरीला हो जाता है। उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक ऐसा ही नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने राज्य का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ लोगों द्वारा बेहद अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इस घटना के बाद से न केवल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है, बल्कि खुद सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपनी बेटी पर हुए इस मानसिक हमले से बुरी तरह तिलमिला गए हैं। उन्होंने इस पूरे मामले पर बेहद तीखी और भावुक प्रतिक्रिया दी है, जिसके बाद यूपी की कानून व्यवस्था और सोशल मीडिया की मर्यादा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
जब बेटी के अपमान पर फूटा पिता का गुस्सा: ‘बिना परिवार वाले क्या जानें दुख’
बेटी अदिति यादव पर की जा रही अमर्यादित और भद्दी टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सपा मुखिया अखिलेश यादव का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बिना किसी का नाम लिए देश और प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोला। अखिलेश यादव ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जो लोग आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं, वे एक परिवार की अहमियत और उसकी संवेदनाओं को कभी नहीं समझ सकते। उन्होंने कहा, “ये हमले सोची-समझी रणनीति के तहत किए जा रहे हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि ऊपर जो दो लोग बैठे हैं, उनका अपना कोई परिवार ही नहीं है। जो लोग खुद परिवार वाले होते हैं, वही दूसरे के परिवार का दुख-दर्द और सम्मान समझ सकते हैं। जो लोग आज ऊंची कुर्सियों पर बैठे हैं, उन्हें किसी की बहन-बेटी या परिवार की कोई चिंता नहीं है।” अखिलेश के इस बयान ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले को सिर्फ एक ट्रोलिंग की तरह नहीं देख रहे, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक साजिश मान रहे हैं।
कानपुर में FIR दर्ज: सपा कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा, कार्रवाई की उठी मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है। सपा के आईटी सेल और महिला विंग ने इसे सीधे तौर पर महिलाओं के सम्मान से खिलवाड़ बताया है। विवाद को बढ़ता देख इस मामले में अब कानूनी कार्रवाई भी शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में सपा नेताओं की शिकायत पर तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर सेल को भी जांच में लगा दिया है। सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक इन आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता और इस तरह की गंदी राजनीति करने वालों को सबक नहीं मिलता, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से भी लगातार इन आरोपियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठ रही है।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर का पलटवार: ‘दूसरों को गाली देने वाले पहले अपने गिरेबान में झांकें’
अखिलेश यादव के इस बयान और सपा के गुस्से के बीच अब विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं, जिसने इस पूरे मामले को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस पूरे विवाद पर सपा को ही आड़े हाथों लिया। हालांकि, राजभर ने अदिति यादव के खिलाफ की गई टिप्पणी की निंदा की, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोला। राजभर ने कहा, “बेटी अदिति के खिलाफ लाल-हरी टोपी (सपा कार्यकर्ताओं) वालों में से जिसने भी यह आपत्तिजनक पोस्ट की है, वह बेहद शर्मनाक और गुनाह-ए-अज़ीम है। लेकिन अखिलेश यादव और उनके सपाइयों को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। ये वो लोग हैं जो हमेशा अपने से नीचे के लोगों और राजनीतिक विरोधियों को गालियां देते हैं और अपने कार्यकर्ताओं से दिलवाते रहते हैं।” राजभर के इस बयान के बाद यह मामला अब पूरी तरह से ‘ट्विटर वॉर’ और राजनीतिक नूराकुश्ती में तब्दील हो चुका है।








