‘मृत’ घोषित बेटी अचानक थाने पहुंची जिंदा, जिस केस में पिता-भाई जेल में थे उसमें कैसे हुआ इतना बड़ा चौंकाने वाला खेल?

Maharashtra News: महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस जांच प्रक्रिया और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले की रहने वाली शिवानी कलमेकर से जुड़ा है, जो अप्रैल महीने में अचानक लापता हो गई थी। परिवार उसकी तलाश कर ही रहा था कि मई के पहले सप्ताह में बुलढाणा के जलगांव जामोद क्षेत्र में राजुरा बांध के पास एक अज्ञात महिला का क्षत-विक्षत शव मिला। शव की हालत बेहद भयावह थी, सिर गायब था और पहचान छिपाने के लिए शरीर को जलाने की कोशिश भी की गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की।

बिना डीएनए टेस्ट के ‘हत्या केस’ बना दिया गया बड़ा आरोप

सबसे गंभीर बात यह रही कि पुलिस ने बिना किसी डीएनए जांच या ठोस फॉरेंसिक सबूत के यह मान लिया कि बरामद शव लापता शिवानी का ही है। इसी अनुमान के आधार पर जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने लड़की के पिता और भाई को आरोपी मान लिया। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने ही मिलकर हत्या की है। इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के गंभीर मामलों में पहचान की पुष्टि के लिए डीएनए टेस्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बेहद जरूरी होती है, लेकिन इस मामले में प्रारंभिक स्तर पर ही गंभीर चूक हो गई।

जेल में बंद थे बेगुनाह, अचानक सामने आई ‘मृत’ घोषित लड़की

जहां एक तरफ शिवानी के पिता और भाई जेल में बंद थे और अपनी बेगुनाही साबित करने की कोशिश कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ कहानी ने अचानक ऐसा मोड़ लिया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। जिस लड़की को पुलिस ने मृत मानकर केस बंद करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए थे, वह अचानक खुद जिंदा हालत में जलगांव जामोद पुलिस स्टेशन पहुंच गई। उसे देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी भी हैरान रह गए। इस घटना ने पूरे पुलिस महकमे को हिला दिया और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

पुलिस जांच पर सवाल, अब कार्रवाई की मांग तेज

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच के तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। बिना पुख्ता सबूतों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचकर निर्दोष लोगों को जेल भेजने की गलती ने सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब मांग की जा रही है कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और लापरवाही बरतने वाली जांच टीम पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल शिवानी के जिंदा मिलने के बाद मामला पूरी तरह पलट गया है और पुलिस अब बैकफुट पर नजर आ रही है।

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