उत्तर प्रदेश की सियासत में रविवार को उस समय नया उबाल आ गया, जब सूबे के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गो-रक्षा जनजागरण यात्रा को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया. बाराबंकी के जिला अस्पताल परिसर में आयोजित एक वृक्षारोपण कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे डिप्टी सीएम ने मीडिया से बात करते हुए सीधे तौर पर आरोप लगाया कि कुछ लोग भगवा चोला धारण करके जनता की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह सब जनता को भ्रमित करने की एक सोची-समझी साजिश है, लेकिन उत्तर प्रदेश की समझदार जनता अब विपक्ष के इन पैंतरों को पूरी तरह समझ चुकी है और उनके बहकावे में आने वाली नहीं है.
राम मंदिर का विरोध और अब वोट की राजनीति: पाठक का विपक्ष से तीखा सवाल
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन को आड़े हाथों लेते हुए अतीत के पन्नों को पलटा. उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग आज अचानक सनातन धर्म और गो-रक्षा की चिंता करने का ढोंग रच रहे हैं, उन्हें पहले यह साफ करना चाहिए कि जब अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा था, तब उनकी भूमिका और रुख क्या था? उपमुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जिन ताकतों ने हमेशा राम मंदिर का विरोध किया, वे आज केवल चुनावी लाभ और वोट बैंक की राजनीति के लिए धार्मिक आस्था का मुखौटा पहनकर सामने आ रही हैं. उन्होंने इसे विपक्ष का दोहरा चरित्र करार दिया.
मस्जिद का चंदा, मदरसा फंडिंग और तुष्टिकरण का ‘चक्रव्यूह’
अपने संबोधन को और आक्रामक बनाते हुए ब्रजेश पाठक ने धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण के लिए आवंटित की गई जमीन और उस दौरान इकट्ठा किए गए चंदे का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया. उन्होंने पूछा कि उस चंदे का आज तक क्या हुआ, इसका हिसाब जनता को क्यों नहीं दिया गया? इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में मदरसों की फंडिंग और उससे जुड़े संदिग्ध मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष इन गंभीर विषयों पर हमेशा चुप्पी साध लेता है. पाठक के मुताबिक, यह पूरी कवायद और कुछ नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक विशेष वर्ग को खुश करने के लिए की जा रही तुष्टिकरण की राजनीति है.
सबका साथ, सबका विकास बनाम समाज को बांटने वाली ताकतों की जंग
खबरों के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक और दिलचस्प मोड़ तब सामने आया जब सपा और ओपी राजभर के बीच ‘तलाक’ के तंज के साथ यह दावा किया गया कि 22 जुलाई के बाद समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट हो सकती है. इन सबके बीच डिप्टी सीएम ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मूल मंत्र पर अडिग है. सरकार बिना किसी भेदभाव के हर वर्ग के उत्थान के लिए काम कर रही है, जबकि विपक्ष समाज को जातियों और धर्मों में बांटकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में मसरूफ है. बता दें कि ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की 81 दिवसीय गो-रक्षा यात्रा को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का खुला समर्थन मिला है, जिसने इस पूरे सियासी विवाद को जन्म दिया है.
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