जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बड़ा फैसला लिया है। ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत पर उन्होंने गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या बेहद दुखद और निंदनीय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जम्मू-कश्मीर सरकार इस मुश्किल समय में मृतकों के परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। सरकार की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया गया है। इसके अलावा जिला प्रशासन भी अलग से 6 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराएगा।
ईंट-भट्ठे पर हुआ हमला, इलाज के दौरान गई दूसरी जान
जानकारी के अनुसार यह आतंकी हमला शुक्रवार देर शाम कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्ठे पर हुआ, जहां कई गैर-स्थानीय मजदूर काम कर रहे थे। हमलावरों ने अचानक मजदूरों पर गोलीबारी कर दी, जिसमें दो श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। दीपक रात्रे नामक मजदूर की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी। वहीं दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए श्रीनगर स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों की लगातार कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है।
छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे दोनों मृतक
हमले में जान गंवाने वाले दोनों मजदूर छत्तीसगढ़ के निवासी थे और रोज़गार की तलाश में जम्मू-कश्मीर पहुंचे थे। उनकी उम्र लगभग 20 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है। इस घटना ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि सरकार केवल आर्थिक सहायता ही नहीं देगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर हर संभव सहयोग भी करेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि सहायता राशि जल्द से जल्द पीड़ित परिवारों तक पहुंचाई जाए। सरकार ने यह भी कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और ऐसे हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही हैं।
लगातार हो रहे हमलों से बढ़ी चिंता
कुलगाम की यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दक्षिण कश्मीर में हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। कुछ दिन पहले अनंतनाग में भी एक पुलिस अधिकारी पर हमला हुआ था। इससे पहले वर्ष 2024 में श्रीनगर के शहीदगंज इलाके में पंजाब के दो गैर-स्थानीय मजदूरों की भी आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। लगातार गैर-स्थानीय लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और हमले में शामिल आतंकियों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। सरकार का कहना है कि घाटी में शांति बनाए रखने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
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