पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। जम्मू-कश्मीर जॉइंट पीपुल्स एक्शन कमेटी (JAAC) के सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने दावा किया है कि पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इस घटनाक्रम के बाद PoK की स्थिति को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।
प्रदर्शनकारियों ने लगाए सीधी गोलीबारी के आरोप
उमर नजीर कश्मीरी का कहना है कि लोग अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से धरना और प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोली चलाने जैसी घटनाएं हुईं, जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। उनका दावा है कि कई घायल अब भी इलाज करा रहे हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि आम नागरिकों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस्लामाबाद में भी उठा समर्थन का स्वर
PoK की घटनाओं के बीच 31 जुलाई को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में भी विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व सीनेटर मुश्ताक खान सहित कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में मौजूद लोगों ने PoK के प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया और उनकी मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उमर नजीर कश्मीरी ने इस रैली में शामिल सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह एकजुटता उनके आंदोलन को नई ताकत देगी। उन्होंने बताया कि रावलकोट में उनका धरना लगातार जारी है और वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
आगे क्या होगा, इस पर सभी की नजरें
PoK में जारी विरोध प्रदर्शन अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पाकिस्तान के भीतर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है। प्रदर्शनकारी लगातार अपने अधिकारों और सुरक्षा की मांग उठा रहे हैं, जबकि हालिया हिंसा के दावों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं होते हैं, तो आने वाले दिनों में यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौतों और घायल होने के दावों की निष्पक्ष जांच होगी या नहीं, और क्या प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।
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