दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सामने आए कुछ वीडियो को लेकर पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। प्रदर्शन से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस उनकी जांच कर रही है। इसी क्रम में नोएडा की एक छात्रा के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि पुलिस उन वीडियो की जांच कर रही है, जिनमें प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे कानून के तहत उचित कार्रवाई बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं।
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उठाए सवाल
इस मामले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी एक छात्रा को निशाना बनाकर उदाहरण बनाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। सौरव दास ने सवाल किया कि क्या इस देश में अपशब्द बोलना अपने आप में अपराध माना जा सकता है। उनका कहना था कि युवाओं के खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई करना उचित नहीं है और कानून का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस छात्रों को निशाना बना रही है, जिसे लेकर उन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
मानहानि और कानूनी अधिकारों का भी किया जिक्र
सौरव दास ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी बयान या टिप्पणी से आपत्ति है, तो उसके लिए कानून में मानहानि जैसे कानूनी विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को किसी टिप्पणी से आपत्ति हुई है तो वह कानून के अनुसार उचित कदम उठा सकते हैं। साथ ही उन्होंने अदालत से अपील की कि संबंधित छात्रा के कानूनी अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। हालांकि, यह CJP की ओर से दिया गया राजनीतिक बयान है। दूसरी ओर, पुलिस की ओर से इस मामले में जांच जारी है और अब तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की गई है।
जांच जारी, कानूनी प्रक्रिया पर टिकी नजर
जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो की जांच फिलहाल जारी है। पुलिस सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर तथ्यों की पड़ताल कर रही है। मामले में किस आधार पर एफआईआर दर्ज की गई है और आगे किन धाराओं में कार्रवाई होगी, यह जांच पूरी होने के बाद अधिक स्पष्ट होगा। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा। फिलहाल इस मुद्दे ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी और कानून के दायरे को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।








