कुर्बानी की तैयारी पूरी, फिर अचानक क्यों पीछे हटा प्रशासन? मुस्लिम समाज बोला- ‘BJP के दबाव में…’

मुंबई में ईद-उल-अजहा से ठीक पहले एक फैसला बड़ा विवाद खड़ा कर गया। बीएमसी ने गोरेगांव पूर्व के गोकुलधाम इलाके में एक हाउसिंग सोसाइटी परिसर में दी गई कुर्बानी की अनुमति अचानक वापस ले ली। बताया जा रहा है कि सैटेलाइट गार्डन फेज-1 स्थित आजाद नगर डी-3 बिल्डिंग के कंपाउंड में बकरीद के लिए पहले से तैयारी चल रही थी। वहां शेड बनाया गया था और कुर्बानी के लिए बकरे भी लाए जा चुके थे। लेकिन त्योहार से सिर्फ एक रात पहले अनुमति रद्द होने की खबर सामने आई, जिसके बाद इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल बन गया। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का कहना है कि यह फैसला अचानक लिया गया और इससे लोगों को काफी परेशानी हुई। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया और लोग प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाने लगे।

बीजेपी नगरसेविका की आपत्ति के बाद बदला निर्णय

इस पूरे विवाद के बीच Priti Satam का नाम भी चर्चा में आया। जानकारी के अनुसार बीजेपी की स्थानीय नगरसेविका प्रीति साटम ने बीएमसी अधिकारियों को पत्र लिखकर इस अनुमति पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि जिस जगह कुर्बानी की तैयारी की जा रही थी, उसके पास स्कूल और हिंदू धार्मिक स्थल मौजूद हैं। पत्र में यह भी कहा गया कि इससे कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा होने का खतरा है। इसके बाद प्रशासन ने अनुमति वापस लेने का फैसला किया। हालांकि इस फैसले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई। वहीं स्थानीय प्रशासन का कहना है कि फैसला शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया है।

मुस्लिम समाज में नाराजगी

अनुमति रद्द होने के बाद स्थानीय मुस्लिम समुदाय में काफी नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से त्योहारों के दौरान इस तरह की दिक्कतें बढ़ रही हैं। समुदाय के लोगों का आरोप है कि उन्हें अपने धार्मिक त्योहार मनाने में परेशान किया जा रहा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि संविधान सभी धर्मों को अपने रीति-रिवाजों के अनुसार त्योहार मनाने की आजादी देता है, ऐसे में अंतिम समय पर अनुमति रद्द करना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर बाकी समुदाय अपने त्योहार मना सकते हैं तो मुस्लिम समाज को क्यों रोका जा रहा है। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि प्रशासन को सभी पक्षों के साथ बातचीत करके समाधान निकालना चाहिए था। वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग दो हिस्सों में बंटे नजर आए। कुछ लोगों ने प्रशासन के फैसले को सही बताया, जबकि कई यूजर्स ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए।

BMC ने दी सफाई, 119 जगहों पर मिली है अनुमति

पूरा मामला सामने आने के बाद बीएमसी अधिकारियों ने सफाई भी दी। उपमहापौर Sanjay Ghadi ने बताया कि इस साल बकरीद के मौके पर मुंबई में 119 स्थानों पर कुर्बानी की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि केवल गोरेगांव और घाटकोपर की दो जगहों पर स्थानीय लोगों की आपत्ति के बाद अनुमति रद्द की गई। प्रशासन का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि शांति बनाए रखना है। हालांकि विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई है। कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अपील की है कि भविष्य में ऐसे मामलों में पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं ताकि त्योहारों के समय विवाद की स्थिति न बने। फिलहाल मुंबई में यह मामला चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।

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