UP में बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा अभियान: अनफिट स्कूल वाहन पर अब सीधे होगा एक्शन, जानें 1 से 15 अप्रैल की नई व्यवस्था

उत्तर प्रदेश (UP) सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेशभर में 1 से 15 अप्रैल 2026 तक स्कूली वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के दौरान स्कूल बस, वैन और अन्य डिलीवरी वाहन जिनमें बच्चों को लाया-जाया जाता है, उनकी कड़ी निगरानी की जाएगी। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी वाहन अनफिट हालत में बच्चों की सेवा में न लगे। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अनफिट पाए जाने वाले वाहन पर सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल से होगा रीयल-टाइम ट्रैकिंग

इस अभियान के तहत परिवहन विभाग ने विशेष डिजिटल प्रणाली तैयार की है। इसे इंटीग्रेटेड स्कूल व्हीकल मॉनीटरिंग पोर्टल कहा गया है। सभी स्कूलों को अपने वाहनों का विवरण इस पोर्टल पर दर्ज कराना अनिवार्य होगा। इस पोर्टल से न केवल वाहनों और चालकों का स्वतः सत्यापन संभव होगा, बल्कि रीयल-टाइम ट्रैकिंग और अलर्ट सिस्टम के जरिए किसी भी अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। पोर्टल को वाहन और सारथी डेटाबेस से जोड़ा गया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

फिटनेस, बीमा और परमिट से संबंधित सभी दस्तावेज होंगे पारदर्शी

मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के दौरान स्कूल वाहनों की फिटनेस, बीमा और परमिट दस्तावेजों की कड़ी निगरानी की जाए। अभिभावक भी पोर्टल के माध्यम से वाहन की स्थिति, फिटनेस और परमिट की जानकारी देख सकेंगे। अधिकारियों का यह भी निर्देश था कि वाहन संचालन में कोई लापरवाही न हो और बच्चों की आवाजाही हमेशा सुरक्षित रहे। गो-आश्रय स्थलों और प्राकृतिक खेती जैसे अन्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए उन्होंने ग्रामीण विकास, चारे की उपलब्धता और किसानों को समयबद्ध क्षतिपूर्ति देने के निर्देश भी दिए।

बच्चों की सुरक्षा के लिए यूपी सरकार का पारदर्शी और सख्त कदम

विशेष अभियान के दौरान अनफिट पाए जाने वाले वाहन तुरंत रोक दिए जाएंगे और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूली वाहनों की नियमित निरीक्षण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए। डिजिटल पोर्टल से सभी जानकारी सुरक्षित होगी और रीयल-टाइम निगरानी से वाहन चालकों की जवाबदेही तय होगी। यह कदम यूपी सरकार की तरफ से बच्चों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

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