बिहार के चंपारण के रहने वाले आदर्श कुमार की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखने की हिम्मत रखते हैं। आदर्श ने महज 14 साल की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में घर छोड़कर कोटा का रुख किया था। उस समय उनके पास करीब 1,000 रुपये और एक पुराना लैपटॉप था। आर्थिक परेशानियों के कारण कोचिंग की फीस जुटाना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई के साथ नए प्रोजेक्ट्स और स्टार्टअप आइडिया पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्होंने Skillzo नाम का प्लेटफॉर्म तैयार किया, जिसका उद्देश्य छात्रों को स्किल सीखने, सही मेंटरशिप पाने और अलग-अलग अवसरों से जोड़ना था। आज उनकी यह पहल करीब 20 हजार छात्रों तक पहुंच चुकी है। आदर्श की मेहनत ने उन्हें Google Youth Advisor जैसे अवसर भी दिलाए और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का मौका मिला।
11 हजार छात्रों में चुने गए Global Student Prize विजेता
आदर्श की उपलब्धियों का सिलसिला यहीं नहीं रुका। साल 2025 में उन्हें Global Student Prize से सम्मानित किया गया। दुनिया के 148 देशों से आए करीब 11 हजार नामांकन में से आदर्श को विजेता चुना गया। इस उपलब्धि ने उनकी पहचान को बिहार से बाहर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा दिया। हालांकि विदेश में पढ़ाई का सपना पूरा करना उनके लिए आसान नहीं था। उन्हें अलग-अलग देशों की करीब 22 यूनिवर्सिटीज से एडमिशन रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। एक समय ऐसा भी आया जब सामान्य एडमिशन के विकल्प लगभग खत्म हो गए थे। इसी दौरान Second Chance प्रक्रिया के जरिए उनका आवेदन Georgetown University in Qatar तक पहुंचा। यूनिवर्सिटी ने उनकी प्रोफाइल पर विचार किया और आखिरकार उन्हें करीब 3.5 करोड़ रुपये की फुल-राइड स्कॉलरशिप के साथ दाखिला मिल गया।
मां के साथ बैठे थे, तभी आया करोड़ों की स्कॉलरशिप का ईमेल
Georgetown University in Qatar से एडमिशन और स्कॉलरशिप की जानकारी वाला ईमेल जब आदर्श को मिला, उस समय वह अपनी मां के साथ बैठे थे। उन्होंने सबसे पहले यह खुशखबरी अपनी मां को ही दी। इस स्कॉलरशिप में ट्यूशन फीस के साथ रहने, खाने, फ्लाइट, वीजा, हेल्थ इंश्योरेंस और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्च शामिल हैं। अब आदर्श कतर के दोहा स्थित Education City में दुनिया के 70 से अधिक देशों के छात्रों के साथ पढ़ाई करेंगे। उनकी रुचि Political Science, Economics और International Relations में है। बिहार में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं को करीब से देखने के कारण उनकी दिलचस्पी पॉलिसी और गवर्नेंस में बढ़ी है। 14 साल की उम्र में सीमित पैसों और पुराने लैपटॉप के साथ शुरू हुआ सफर अब करोड़ों की स्कॉलरशिप तक पहुंच चुका है।
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