बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान से जुड़े बहुचर्चित काले हिरण शिकार मामले की पृष्ठभूमि पर बन रही फिल्म ‘काला हिरण’ अब रिलीज से पहले ही बड़े कानूनी और सामाजिक विवादों के घेरे में आ गई है। इस फिल्म को लेकर राजस्थान के जोधपुर सहित पूरे देश में बिश्नोई समाज का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेंद्र बुढ़िया ने इस फिल्म के निर्माण और इसके उद्देश्यों पर तीखा सवाल उठाते हुए इसके प्रसारण पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की है। उनका साफ कहना है कि इस फिल्म के जरिए देश और दुनिया में बिश्नोई समाज की गौरवशाली और पर्यावरण-प्रेमी छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है, जिसे समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
फिल्म निर्माता अमित जानी पर गंभीर आरोप और पब्लिसिटी स्टंट का दावा
अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के अध्यक्ष देवेंद्र बुढ़िया ने फिल्म के निर्माता अमित जानी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि वह समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमित जानी का बिश्नोई समाज से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। बुढ़िया ने निर्माता द्वारा अपनी जान को खतरा बताए जाने वाले बयानों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल और केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का हथकंडा करार दिया है। उनका आरोप है कि फिल्म की रिलीज से पहले हाइप बनाने के लिए कुछ फर्जी और धमकी भरे फोन कॉल्स का ड्रामा रचा जा रहा है ताकि मीडिया में सुर्खियां बटोरी जा सकें। समाज के नेताओं का मानना है कि यह प्रोजेक्ट कला या सच्चाई से कोसों दूर है और इसका एकमात्र मकसद विवाद पैदा करके व्यावसायिक फायदा उठाना है।
युवाओं को गैंगस्टर के रूप में दिखाने पर भड़का समाज
बिश्नोई समाज पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने के इतिहास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, और वे काले हिरण को अपने आराध्य यानी देवतुल्य मानते हैं। देवेंद्र बुढ़िया ने चिंता जताई है कि ‘काला हिरण’ फिल्म में बिश्नोई समाज के युवाओं को कथित तौर पर एक ‘गैंगस्टर’ के रूप में पेश किया जा रहा है। उनका तर्क है कि सलमान खान के साथ जुड़ा शिकार का कानूनी मामला एक अलग और व्यक्तिगत विषय है, लेकिन इस फिल्म के माध्यम से पूरे समुदाय की युवा पीढ़ी को अपराधियों की तरह चित्रित करना बेहद आपत्तिजनक है। इससे न केवल युवाओं के भविष्य पर गलत असर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर बिश्नोई समाज की उस महान परंपरा को भी ठेस पहुंचेगी जो अहिंसा और जीव-दया के संदेश के लिए पहचानी जाती है।
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश और कानूनी व लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब अभिनेता सलमान खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक को फटकार लगाते हुए सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स से फिल्म का टीजर तत्काल हटाने का सख्त निर्देश दिया है। कोर्ट के इस आदेश के बाद फिल्म के खिलाफ विरोध के सुर और अधिक तेज हो गए हैं। बिश्नोई समाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी तरह की हिंसा या गैर-कानूनी गतिविधि में विश्वास नहीं रखते, लेकिन अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों से मिलकर इस फिल्म के खिलाफ पूरी ताकत से लोकतांत्रिक और कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। समाज ने सरकार से मांग की है कि ऐसे किसी भी कंटेंट को हरी झंडी न दी जाए जो जनभावनाओं को आहत करे।








