‘न फोन किया, न अंतिम दर्शन को आए बिग बी…’ मुकरी की बेटी के छलके आंसुओं ने खोले बॉलीवुड के काले सच, बोलीं- इंडस्ट्री में सिर्फ मतलब की होती है दोस्ती!

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे बेहतरीन कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी अदायगी से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है। ऐसे ही दिग्गज हास्य अभिनेता थे मुकरी, जिन्होंने अपनी कमाल की कॉमिक Timing और बेहतरीन संवाद अदायगी से हर किसी को हंसाया। हालांकि, पर्दे पर लोगों को हंसाने वाले इस कलाकार के घर में उस वक्त मातम छा गया जब साल 2000 में उनका निधन हो गया। हाल ही में मुकरी की बेटी नसीम ने एक इंटरव्यू के दौरान फिल्म इंडस्ट्री के रिश्तों की असलियत पर खुलकर बात की है। नसीम ने बताया कि कैसे वक्त बदलने के साथ ही बॉलीवुड के बड़े-बड़े चेहरों के तेवर भी बदल जाते हैं और जब किसी कलाकार का वक्त ढल जाता है, तो कोई सुध लेने तक नहीं आता।

अमिताभ बच्चन और जया बच्चन पर फूटा दर्द: न अंतिम संस्कार में आए, न एक फोन किया

मुकरी की बेटी नसीम ने एक पत्रकार को दिए गए इंटरव्यू में सनसनीखेज खुलासे करते हुए बताया कि उनके पिता के दुनिया छोड़ने के बाद सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने उनसे कोई नाता नहीं रखा। नसीम के मुताबिक, अपने शुरुआती संघर्ष के दिनों में अमिताभ बच्चन उनके पिता मुकरी के घर अक्सर आते-जाते थे और दोनों के बीच अच्छे संबंध थे। लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि मुकरी के निधन के बाद न तो अमिताभ बच्चन उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और ना ही परिवार की सुध ली। यही नहीं, नसीम ने यह भी बताया कि जया बच्चन, जिन्होंने उनके पिता के साथ ‘पिया का घर’ जैसी फिल्मों में काम किया था, उन्होंने भी इस दुख की घड़ी में एक फोन तक करना मुनासिब नहीं समझा।

ऋषि कपूर का वो रूप: सुबह-सुबह घर पहुंचे और बच्चे की तरह फूट-फूटकर रोने लगे

एक तरफ जहां अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, वहीं दिवंगत अभिनेता ऋषि कपूर का मानवीय रूप इस परिवार के लिए हमेशा यादگار बन गया। नसीम ने नम आंखों से उस घटना को याद करते हुए बताया कि ऋषि कपूर को जब आधी रात को टीवी के जरिए मुकरी के निधन की खबर मिली, तो उनका दिल दहल गया था। अगली सुबह होते ही, करीब सात बजे ऋषि कपूर सीधे मुकरी के घर पहुंच गए और दरवाजे पर आते ही एक छोटे बच्चे की तरह फफक-फफक कर रोने लगे। ऋषि कपूर और मुकरी ने कई फिल्मों में साथ काम किया था और ऋषि उनके जाने के दुख को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थे, जिससे यह साबित होता है कि कुछ रिश्ते कागजी नहीं बल्कि रूह से जुड़े होते हैं।

हिंदी सिनेमा के वे सुनहरे दिन: ‘शराबी’ और ‘लावारिस’ जैसी फिल्मों से अमर हुए मुकरी

बता दें कि मुकरी ने अपने लंबे सिने करियर में ‘मदर इंडिया’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘बॉम्बे टू गोवा’, ‘कुली’, ‘लावारिस’ और ‘शराबी’ जैसी दर्जनों सुपरहिट फिल्मों में काम किया था। अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी पर्दे पर बेहद पसंद की जाती थी और फिल्म ‘शराबी’ का वह मशहूर संवाद ‘मूंछें हो तो नत्थूलाल जैसी’ आज भी सिनेप्रेमियों की जुबान पर ताजा है। 78 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पड़ने से मुंबई में उनका निधन हो गया था। भले ही आज ये दिग्गज कलाकार इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन नसीम के इस ताजा बयान ने एक बार फिर बॉलीवुड की चकाचौंध के पीछे छिपे अकेलेपन और फिल्मी रिश्तों की सच्चाई को सबके सामने ला खड़ा किया है।

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