Pipalkoti Tunnel Accident: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्यों के बीच छिपे खतरों ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है। चमोली जिले के पिपलकोटी में चल रहे टीएचडीसी (तहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में गुरुवार की रात आम दिनों की तरह ही काम चल रहा था। दर्जनों मजदूर जमीन से सैकड़ों फीट नीचे पूरी निष्ठा के साथ अपनी शिफ्ट पूरी करने में जुटे थे। तभी अचानक सुरंग के अंदरूनी हिस्से से आई एक तेज गड़गड़ाहट ने सबको चौंका दिया। इससे पहले कि वहां मौजूद श्रमिक कुछ समझ पाते, पहाड़ों के पेट से निकला पानी और भारी मलबे का सैलाब तेजी से अंदर की तरफ दौड़ पड़ा। अंधेरे और संकरे रास्ते के बीच भागने का कोई मौका नहीं मिला और पलक झपकते ही वहां चीख-पुकार मच गई।
मौत के मुंह से निकलकर आए श्रमिकों ने बयां किया खौफनाक मंजर
सुरंग के भीतर फंसे लोगों के लिए हर बीतता सेकंड किसी परीक्षा से कम नहीं था। पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई मजदूर सीधे मलबे की चपेट में आ गए। जैसे-जैसे अंदर पानी का स्तर बढ़ने लगा, वहां मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए दीवारों और ऊंचे पत्थरों के सहारे टिकने की कोशिश करने लगे। लगातार रिसाव और दलदल जैसी स्थिति के कारण भाग पाना नामुमकिन साबित हो रहा था। किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकले श्रमिकों ने बताया कि अंदर का नजारा बेहद डरावना था। चारों तरफ सिर्फ गंदा पानी, भारी पत्थर और साथियों की मदद मांगने की आवाजें गूंज रही थीं। कुछ ही मिनटों के भीतर हंसती-खेलती कार्यस्थली एक दलदली खौफनाक जाल में तब्दील हो चुकी थी।
जिंदगी बचाने की जद्दोजहद
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन समेत एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और सेना की विशेषज्ञ टीमों को तत्काल मौके पर तैनात किया गया। सुरंग के भीतर फैले अत्यधिक पानी और मलबे के कारण शुरुआती दौर में राहत कर्मियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आधुनिक पम्पिंग मशीनों, भारी कटर और विशेष उपकरणों के जरिए सुरंग से पानी निकालने का काम रातभर बिना रुके जारी रहा। बचाव कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर अब तक 25 श्रमिकों को सकुशल बाहर निकाल लिया है। हालांकि, अस्पताल पहुंचाए गए घायलों में से कुछ की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। वहीं, अभी भी कुछ अन्य श्रमिकों के अंदर फंसे होने की आशंका के चलते युद्धस्तर पर रेस्क्यू जारी है।
उच्चस्तरीय प्रशासनिक निगरानी और हादसे के कारणों की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन अधिकारियों और सेना के कप्तानों से लगातार संपर्क बनाकर स्थिति का जायजा लिया है। प्रभावित मजदूरों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। उधर, घटनास्थल पर जिलाधिकारी स्वयं मौजूद रहकर राहत व बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। इस बात की गहन तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है कि अचानक सुरंग की दीवार टूटकर पानी और मलबे का इतना भयंकर सैलाब कैसे अंदर घुसा। विशेषज्ञ टीम सुरंग की संरचनात्मक सुरक्षा और प्राकृतिक रिसाव के कारणों का अध्ययन कर रही है ताकि भविष्य में ऐसे अप्रत्याशित हादसों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
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