दिल्ली में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस कार्रवाई को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले की नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी और इसे जल्दबाजी में सूचीबद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
‘कोर्ट को इन सब मामलों में न घसीटें’
जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत को हर विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले पर अगली निर्धारित तारीख पर सुनवाई की जाएगी। याचिकाकर्ता का कहना था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया, इसलिए मामले पर तुरंत सुनवाई जरूरी है। लेकिन अदालत ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। हाई कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है।
सोनम वांगचुक की याचिका पर मिला राहत का आदेश
इसी मामले से जुड़ी एक दूसरी याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी ने उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में भर्ती कराने की अनुमति मांगी थी। इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राहत देते हुए सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एम्स के डॉक्टर लगातार उनकी सेहत पर नजर रखे हुए हैं। वहीं, वांगचुक की ओर से मेडिकल रिपोर्ट और डॉक्टरों की सलाह भी अदालत के सामने पेश की गई।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बार-बार समझाने और चेतावनी देने के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पथराव किया और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसी कारण हालात को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी पुलिस पर अनावश्यक लाठीचार्ज का आरोप लगा रहे हैं। अब इस पूरे मामले की सुनवाई अदालत में होगी, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने सबूत और दलीलें पेश करेंगे। आने वाले दिनों में कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि इससे इस विवाद की कानूनी दिशा तय हो सकती है।
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