क्या अब नहीं बच पाएंगे अवैध निर्माण? मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और सख्त संदेश

मेरठ के चर्चित सेंट्रल मार्केट मामले में Supreme Court ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए अवैध निर्माणों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकारों को ऐसा माहौल नहीं बनने देना चाहिए, जिससे लोगों को लगे कि नियमों का उल्लंघन करके बनाए गए निर्माण बाद में कंपाउंडिंग के जरिए आसानी से वैध कराए जा सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि कानून का पालन कराने के लिए समय पर कार्रवाई जरूरी है। यदि प्रशासन शुरुआत में ही नियमों का पालन सुनिश्चित करे तो अवैध निर्माणों की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। अदालत की यह टिप्पणी केवल मेरठ तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

 44 व्यावसायिक संपत्तियों पर तुरंत कार्रवाई के आदेश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने उन 44 सील की गई संपत्तियों पर भी सख्त निर्देश दिए, जहां पूरी तरह से व्यावसायिक निर्माण किए गए हैं। अदालत ने ऐसे निर्माणों को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी आवासीय भवन का कुछ हिस्सा व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, तो स्थानीय परिषद पहले उस हिस्से की पहचान करे और मकान मालिक को 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण हटाने का नोटिस दे। यदि निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं होती, तो परिषद स्वयं अवैध हिस्से को हटाने की कार्रवाई करेगी। अदालत ने साफ संकेत दिया कि नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

ईडब्ल्यूएस मकानों को लेकर भी कोर्ट ने दिखाई सख्ती

सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बने मकानों में हुए अवैध निर्माणों को लेकर भी स्पष्ट रुख अपनाया। अदालत ने ऐसे निर्माणों को कंपाउंडिंग के जरिए वैध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। कोर्ट का मानना है कि यदि इस तरह की छूट दी जाती है तो इससे गलत संदेश जाएगा और लोग नियमों का पालन करने के बजाय बाद में राहत मिलने की उम्मीद में अवैध निर्माण करने लगेंगे। अदालत ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और उसका पालन हर व्यक्ति को करना होगा। चाहे वह प्रभावशाली व्यक्ति हो या सामान्य नागरिक, नियमों के सामने सभी बराबर हैं। कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में अवैध निर्माणों के मामलों पर भी असर डाल सकती है।

अगली सुनवाई में मांगी प्रगति रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई तक यह बताया जाए कि उसके आदेशों का कितना पालन हुआ है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर को होगी। साथ ही संबंधित अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि कानून का शासन तभी मजबूत होगा जब नियमों को बिना किसी भेदभाव के लागू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देशभर के नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के लिए एक बड़ा संदेश है कि अवैध निर्माणों के खिलाफ समय पर और सख्त कार्रवाई करना उनकी जिम्मेदारी है।

Read More-गंभीर-अगरकर पर फूटा आर अश्विन का गुस्सा! रोहित को लेकर कहा ‘अगर उसकी जरूरत नहीं है तो…’

Hot this week

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img