दिल्ली हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत! आखिर क्यों दोबारा चालू हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का X अकाउंट?

दिल्ली हाई कोर्ट ने ‘Cockroach Janata Party’ के एक्स (X) अकाउंट को दोबारा चालू करने का आदेश दिया है। यह फैसला पार्टी से जुड़े अभिजीत दिपके की याचिका पर सुनाया गया। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि अकाउंट को अस्थायी रूप से इसलिए ब्लॉक किया गया था, क्योंकि उसकी कुछ पोस्ट NEET परीक्षा के दौरान छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम और अफवाह फैला सकती थीं। लेकिन अदालत ने कहा कि अब परीक्षा पूरी हो चुकी है, इसलिए उस आधार पर अकाउंट बंद रखने की जरूरत नहीं है। इसी वजह से हाई कोर्ट ने एक्स अकाउंट को फिर से बहाल करने का आदेश दे दिया।

कोर्ट ने अभिव्यक्ति की आजादी पर भी की अहम टिप्पणी

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने जैसे फैसलों की कानूनी जांच जरूरी है। अदालत ने माना कि अभिव्यक्ति की आजादी संविधान का महत्वपूर्ण अधिकार है और इस पर लगाए गए किसी भी प्रतिबंध की उचित वजह होनी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार के ब्लॉक करने वाले आदेश को रद्द करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अकाउंट को बंद रखने का आधार अब नहीं बचा है। इस फैसले को सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण आदेश माना जा रहा है।

कैसे चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’?

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में रही है। शुरुआत में इसे एक व्यंग्य और मीम पेज के रूप में देखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे इसे बड़ी संख्या में लोगों का समर्थन मिलने लगा। कुछ ही दिनों में इसके सोशल मीडिया अकाउंट पर लाखों-करोड़ों लोग जुड़ गए। इंस्टाग्राम पर इसके फॉलोअर्स की संख्या तेजी से बढ़ी और यह कई सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने लगा। इसी वजह से यह प्लेटफॉर्म सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े ऑनलाइन अभियान का हिस्सा बन गया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच बढ़ी चर्चा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच हाई कोर्ट का यह फैसला सामने आया है, जिससे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ फिर सुर्खियों में आ गई है। पार्टी से जुड़े लोगों का कहना है कि वे आगे भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात लोगों तक पहुंचाते रहेंगे। वहीं, अदालत के फैसले के बाद अब एक्स अकाउंट फिर से सक्रिय हो सकेगा। इस मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी और सरकारी कार्रवाई के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आने वाले समय में इस फैसले का असर ऐसे दूसरे मामलों पर भी देखने को मिल सकता है।

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